श्रीवचन भूषण – सूत्रं २०९

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम:

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अवतारिका

जब यह पूछा गया कि “ऐसे में, लाभ या हानि का कारण क्या है?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी ने कृपापूर्वक उत्तर दिया।

सूत्रं – २०९

प्रयोजकम्‌ भगवत्‌ सम्बन्धमुम्‌ असम्बन्धमुम्‌।

सरल अनुवाद

इसका कारण भगवान के साथ सम्बन्ध होना या न होना है।

व्याख्या

प्रयोजकम्‌ …

यानी – भगवान को पाने का कारण है भगवान के साथ वह सम्बन्ध जो व्यक्ति को भगवान का अनन्य सेवक बनाए रखता है; और भगवान को खोने का कारण है भगवान के साथ सम्बन्ध का न होना यानी ऐसी अनन्य सेवा-भावना के लिए अनिवार्य/आवश्यक  ज्ञान का अभाव।

अडियेन् केशव रामानुज दास

आधार – https://granthams.koyil.org/2021/09/02/srivachana-bhushanam-suthram-209-english/

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