श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम:
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अवतारिका
जब उनसे पूछा गया कि, “आपने अन्य उपायों में भी इसी प्रकार अनेक दोषों को दर्शाया है। क्या प्रपत्ति नामक उपाय में कोई दोष नहीं है?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक समझाते हैं।
सूत्रं – १३४
प्रपत्युपायत्तुक्कु इक्कुट्रङ्गळ् ऒन्ऱुम् इल्लै।
सरल अनुवाद
प्रपत्ति (न्यास) नामक उपाय में ये दोष नहीं होते।
व्याख्या
प्रपत्युपायत्तुक्कु …
इक्कुट्रङ्गळ्
किसी के वास्तविक स्वभाव के विपरीत होने से लेकर उसे निभाना कठिन होने तक, सभी बातें यहां प्रतिबिंबित होती हैं।
ऒन्ऱुम् इल्लै
ऐसा कहा जाता है कि प्रपत्ति में इनमें से कोई भी दोष नहीं होता।
इक्कुट्रङ्गळ् ऒन्ऱुम् इल्लै
क्योंकि ऐसा कहा गया है कि इनमें से कोई भी दोष प्रपत्ति में विद्यमान नहीं है, इसलिए ऐसा प्रतीत होता है कि इसमें कोई अन्य दोष है। अर्थात् – यद्यपि प्रपत्ति वस्तुतः साधन नहीं है, तथापि ऊपरी दृष्टि से देखने पर वह साधन मानी जा सकती है।
अडियेन् केशव रामानुज दास
आधार: https://granthams.koyil.org/2021/06/18/srivachana-bhushanam-suthram-134-english/
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