श्रीवचन भूषण – सूत्रं १३०
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब पूछा गया कि “यह उपासना, जो एक बार निर्धारित की गई थी, पश्चात निषिद्ध क्यों कर दी गई?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक समझाते हैं। सूत्रं – १३० इदुदान् पूर्व विहित हिम्सैपोले विधि निषेधङ्गळ् इरण्डुक्कुम् कुऱै इल्लै। सरल … Read more