श्रीवचन भूषण – सूत्रं २०३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका इस संदर्भ में, श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी हमें दो घटनाओं का स्मरण दिला रहे हैं। सूत्रं – २०३ इव्विडत्तिले, वैनतेय व्रुत्तान्तत्तैयुं, पिळ्ळैप पिळ्ळै आऴ्वानुक्कु आऴ्वान् पणित्त वार्त्तैयैयुं स्मरिप्पदु. सरल अनुवाद यहाँ, श्रीगरुडाऴ्वार् से जुड़ी घटना और पिळ्ळैप्‌ पिळ्ळै आऴ्वान् … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं २०२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी इस प्रश्न का दयापूर्वक उत्तर देते हैं कि “क्या इसके लिए कोई प्रमाण (धर्मग्रंथों का आधार) है [कि भागवत अपचार व्यक्ति की योग्यता पर आधारित नहीं होता]?” सूत्रं – २०२ “तमर्गळिल्‌ तलैवराय सादि अन्दणर्गळेलुम्‌” ऎङ्गैयाले … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं २०१

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब यह पूछा गया कि “क्या जब जन्म अथवा ज्ञान में हीन व्यक्ति, इन विषयों में श्रेष्ठ व्यक्ति के प्रति ऐसा अपचार करे केवल तभी यह ‘भागवत अपचार’ क्रूर माना जाता है? अथवा, श्रेष्ठ व्यक्ति द्वारा हीन व्यक्ति … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं २००

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका कोई विशेष परिचय नहीं। सूत्रं – २०० आरूड पतितन्‌ आगैयाले। सरल अनुवाद क्योंकि वह एक ऊँचे पद से नीचे गिर गया है। व्याख्या इसका कारण [जो पिछले सूत्र में बताया गया है] यह है कि – ‘भागवतत्व’ (भगवान … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १९९

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक ‘कर्म-चाण्डाल’ (जो अपने अपराधों के कारण चाण्डाल बन जाता है) की नीची स्थिति को ‘जाति-चाण्डाल’ (जो चाण्डाल परिवार में पैदा हुआ हो) की तुलना में समझाते हैं ताकि कोई यह न सोचे कि वह … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १९८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका इस ‘अपचार’ (जन्म के आधार पर दूसरों को आंकने का अपराध) का परिणाम जले हुए कपड़े या किसी अस्तित्वहीन वस्तु जैसा होता है; ऐसा व्यक्ति न केवल मृत्यु के समय नष्ट हो जाता है, साथ ही अपराध करते … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १९७

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब ‘अर्चावतार’ (भगवान के मूर्ति-रूप) को उस सामग्री के आधार पर आंकने की क्रूरता के बारे में पूछा गया जिससे वह बनी है, तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी ने दयापूर्वक इसकी व्याख्या किये। सूत्रं – १९७ अत्तै मातृयोनि परीक्षैयोडु … Read more

श्री रामायण तनि श्लोकम् – ८ – बालकाण्डम् ६.८ – द्रष्टुं शक्यम्, २३.२ – कौसल्या सुप्रजा राम

श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमते वरवरमुनये नमः श्रीमते रङ्गदेशिकाय नमः पूरी श्रृंखला << भाग ७ द्रष्टुं शक्यमयोध्यायां नाविद्वान् न च नास्तिकः ।सर्वे नराश्च नार्यश्च धर्मशीलाः सुसंयताः ॥ प्रतिपदार्थ अयोध्यायाम् — अयोध्या में। न — नहीं। अविद्वान् — अशिक्षित, अज्ञानी। न च नास्तिकः — न ही नास्तिक (जो वेदों में विश्वास नहीं रखता)। द्रष्टुं शक्यम् — देखने … Read more

श्री शठकोप स्वामी (नम्माऴ्वार्) के दिव्य नाम – पराङ्कुश, उदयभास्कर 

श्रीः। श्रीमते शठकोपाय नमः। श्रीमते रामानुजाय नमः। श्रीमद्वरवरमुनये नमः। पूरी श्रृंखला  << पूर्व ७. पराङ्कुश  ‘अंकुश’ हाथी को हाँकने या नियंत्रित करने का लोहे का नुकीला छोटा भाला या छड़ है।  उसी प्रकार श्री शठकोप स्वामी ने अपने दिव्य ज्ञान, भगवदनुभव और दिव्यप्रबन्धों के प्रभाव से वेद-विरुद्ध तथा वेदों के विपरीत अर्थ करने वाले विभिन्न … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १९६

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक यह समझा रहे हैं कि जन्म के आधार पर भागवतों को आंकना कितना क्रूर है। सूत्रं – १९६ इदुदान्‌ अर्चावतारत्तिल्‌ उपादान स्मृतियिलुम्‌ काट्टिल्‌ क्रूरम्‌. सरल अनुवाद भगवान के दिव्य ‘अर्चा’ स्वरूप को उस कच्चे … Read more