आचार्य हृदयम् – १८
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – १७ अवतारिका (परिचय) “शास्त्र और तिरुमन्त्र, जो शास्त्र का सार है, क्या योग्य पात्र के या सभी के अनुसरण करने हेतु सुलभ है?” इस प्रश्न का उत्तर यहाँ दिया गया है। चूर्णिका १८ तोल् पुरैये पोमदुक्कुप् … Read more