श्रीवचन भूषण – सूत्रं १७०
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका इसके पश्चात, श्री पिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक समझाते हैं कि भगवान को अपने प्रिय भक्त का शरीर कितना प्रिय होता है। सूत्रं – १७० “तिरुमालिरुञ्जोलै मलैये” ऎन्गिरपडिये उगन्दरुळिन निलङ्गळ् ऎल्लावट्रिलुम् पण्णुम् विरुप्पत्तै इवनुडैय शरीरैकदेशत्तिले पण्णुम् सरल अनुवाद जैसा … Read more