आचार्य हृदयम् – १६

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – १५ अवतारिका (परिचय) इसके अतिरिक्त, नायनार् शास्त्र के अर्थों का संक्षिप्त विवरण करते हैं और दयापूर्वक विवरण करते हैं कि कैसे ईश्वर ने अपने दिव्य हृदय में दयालुता से विचार किया कि ऐसे शास्त्रों के अध्ययन के लिए कितने … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १३५

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका यह प्रकट करने के लिए कि ये [पूर्व वर्णित] दोष प्रपत्ति में विद्यमान नहीं हैं, श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक प्रपत्ति के स्वरुप उचितत्व (स्वयं के वास्तविक स्वरूप के अनुरूप होना) और सुकरत्व (करने में आसान) की व्याख्या करते हैं। … Read more

अन्तिमोपाय निष्ठा – १५ – आचार्य/भागवत प्रशाद और श्रीपाद तीर्थ

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः अन्तिमोपाय निष्ठा << भागवत अपचार पिछले लेख (अन्तिमोपाय निष्ठा – १४ – भागवत अपचार) में हमने भागवत अपचार के दुष्प्रभावों को देखा था। हम इस भाग को जारी रखेंगे जिसमें बताया गया है कि सामान्य रूप से आचार्यों और श्रीवैष्णवों के साथ कैसे … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १३२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब पूछा गया कि “यद्यपि ये अन्य उपायों को विशिष्ट विधियों में विश्वास उत्पन्न करने के लिए निर्धारित किए गए हैं और पश्चात निषिद्ध किए गए हैं, यदि हम उपासना पर अड़े रहे तो क्या यह अभिचार कर्म के … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १३१

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब उनसे पूछा गया कि “शास्त्र ने पहले इनका आदेश क्यों देकर बाद में इनका निषेध क्यों किया?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक समझाते हैं। सूत्रं – १३१ अत्तै शास्त्र विश्वासत्तुक्काग विधित्तदु; इत्तै स्वरूप विश्वासत्तुक्काग विधित्तदु। सरल अनुवाद श्येन … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १३०

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब पूछा गया कि “यह उपासना, जो एक बार निर्धारित की गई थी, पश्चात निषिद्ध क्यों कर दी गई?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक समझाते हैं। सूत्रं – १३० इदुदान् पूर्व विहित हिम्सैपोले विधि निषेधङ्गळ् इरण्डुक्कुम् कुऱै इल्लै। सरल … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १३३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कहते हैं, “इतना ही नहीं, इसका अनुसरण करना भी कठिन है”।  सूत्रं – १३३ इदुदान् कर्म साध्यम् आगैयाले दुष्करुममाय् इरुक्कुम्। सरल अनुवाद क्योंकि यह (भक्ति योग) अनुष्ठानों की सहायता से पूरा किया जाता है, इसलिए इसे … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १३४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब उनसे पूछा गया कि, “आपने अन्य उपायों में भी इसी प्रकार अनेक दोषों को दर्शाया है। क्या प्रपत्ति नामक उपाय में कोई दोष नहीं है?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक समझाते हैं। सूत्रं – १३४ प्रपत्युपायत्तुक्कु इक्कुट्रङ्गळ् ऒन्ऱुम् … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १२९

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कहते हैं, “वेदों ने चेतनों को निम्न स्थिति से उच्च स्थिति तक ऊपर उठाने के लिए इन अन्य साधनों का विधान किया है।” सूत्रं – १२९ इत्तै प्रवत्तिप्पित्तदु परहिम्सैयै निवर्त्तिप्पिक्कैक्काग। सरल अनुवाद  इन अन्य उपायों का … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १२८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक इसका कारण बताते हैं। सूत्रं – १२८ औषध सेवै पण्णादवर्गळुक्कु अभिमत वस्तुक्कळिले अत्तै कलसि इडुवारैप्पोले, ईश्वरनैक् कलन्दु विधिक्किऱदित्तनै। सरल अनुवाद जिस प्रकार लोग उन लोगों को प्रिय खाद्य पदार्थों में मिलाकर औषधि खिलाते हैं जो … Read more