आचार्य हृदयम् – २२
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – २१ अवतारिका (परिचय) नायनार् इस मूलतत्त्व को तिरुमन्त्र में दर्शा रहे हैं (जिसे पिछली चूर्णिका में समझाया गया था) जो स्वरूप याथात्म्य (आत्मा का आंतरिक सच्चा स्वरूप) को प्रकट करता है। तिरुमन्त्र की संक्षिप्त व्याख्या इस चूर्णिका को सुचारू रूप से समझने … Read more