यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग १७
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग १६ उन्होंने श्रीतोऴप्पर् स्वामीजी के पुत्र अप्पन पिळ्ळै को सांत्वना दि जो उनके संग हीं था और उनसे कहा “शोक मत करो क्योंकि उन्होंने अपना दिव्य रूप श्रीशठकोप स्वामीजी के कैंकर्य के लिये दिया हैं; श्रीशठकोप स्वामीजी तुम्हें अपना पुत्र मानते हैं; … Read more