श्रीवचन भूषण – सूत्रं १३४
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब उनसे पूछा गया कि, “आपने अन्य उपायों में भी इसी प्रकार अनेक दोषों को दर्शाया है। क्या प्रपत्ति नामक उपाय में कोई दोष नहीं है?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक समझाते हैं। सूत्रं – १३४ प्रपत्युपायत्तुक्कु इक्कुट्रङ्गळ् ऒन्ऱुम् … Read more