श्रीवचनभूषण – सूत्रं १३८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब उनसे पूछा गया कि “यद्यपि वह (भगवान) पूर्ण है क्या उसकी पूर्णता चेतन को यह सोचकर पीछे हटा देगी कि ‘हम अपनी शून्यता के कारण उन्हें कभी प्रसन्न नहीं कर सकते’?”  तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक समझाते हैं। … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १३७

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व जब पूछा गया कि “परंतु भगवान चेतन से कैसे प्रसन्न होंगे?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक समझाते हैं। सूत्रं १३७ आभिमुख्य सूचक मात्तिरत्तिले सन्तोषम् विळैयुम्। सरल अनुवाद चेतन के अनुकूल चित्त को देखकर ही भगवान प्रसन्न हो जाते हैं। व्याख्या … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १३६

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब पूछा गया कि “क्या कोई पूर्णतः इस बात पर विश्वास रख सकता है कि वह ही उपाय (साधन) है और आत्म-प्रयत्न से विमुख रह सकता है? क्या चेतन को भगवान को प्रसन्न करने के लिए कुछ भी नहीं … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १३५

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका यह प्रकट करने के लिए कि ये [पूर्व वर्णित] दोष प्रपत्ति में विद्यमान नहीं हैं, श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक प्रपत्ति के स्वरुप उचितत्व (स्वयं के वास्तविक स्वरूप के अनुरूप होना) और सुकरत्व (करने में आसान) की व्याख्या करते हैं। … Read more

శ్రీ వచన భూషణము – సూత్రము 5

శ్రీ వచన భూషణము << సూత్రము – 4 సూత్రము – 5 అవతారికమొట్టమొదట “వేదార్ధం.. ” మొదలగు వాక్యములచే పిళ్ళై లోకాచార్యుల వారు వేదమును, వాటి అర్ధములను, ఉపబృంహణములను విస్తృతముగా వివరించినారు. వేదము యొక్క భాగములు అయిన పూర్వ(కర్మ), ఉత్తర(బ్రహ్మ) విభాగములను వివరించినప్పటికీ చేతనుల ఉజ్జీవనమునకు కావలసిన అర్ధములను ప్రతిపాదించుటకు ఉపక్రమించిన వారై అవి (ఆ అర్ధములు) పూర్వ భాగము నుండి తెలియరానివి అగుట చేతను, ఉత్తర భాగము నందే తెలియవచ్చునవి అగుట చేతను, పూర్వ … Read more

శ్రీ వచన భూషణము – సూత్రము 4

శ్రీ వచన భూషణము << సూత్రము – 3 సూత్రము – 4 అవతారికఇతిహాసములు యొక్క గొప్పతనమును పిళ్ళై లోకాచార్యులు ఇంకనూ వివరించుచున్నారు. సూత్రముఅత్తాలే అదుముఴ్పట్టత్తు సంక్షిప్త వ్యాఖ్యానముఆ కారణము చేతనే ఇది మొదటగా పేర్కొనబడినది వ్యాఖ్యానము అత్తాలే…ఛాందోగ్య ఉపనిషత్తు 7.21 “ఇతిహాస పురాణం పంచమం”(ఇతిహాసములు మరియు పురాణములు పంచమ వేదము) అనియు బార్హస్పత్య స్మృతి “ఇతిహాస పురాణాభ్యామ్”(ఇతిహాసములు మరియు పురాణములతో) అని శృతి, స్మృతులలో ఈ రెంటిని గూర్చి చెప్పినప్పుడు ఇతిహాసములు పురాణముల కంటే ముందుగా … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १३२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब पूछा गया कि “यद्यपि ये अन्य उपायों को विशिष्ट विधियों में विश्वास उत्पन्न करने के लिए निर्धारित किए गए हैं और पश्चात निषिद्ध किए गए हैं, यदि हम उपासना पर अड़े रहे तो क्या यह अभिचार कर्म के … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १३१

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब उनसे पूछा गया कि “शास्त्र ने पहले इनका आदेश क्यों देकर बाद में इनका निषेध क्यों किया?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक समझाते हैं। सूत्रं – १३१ अत्तै शास्त्र विश्वासत्तुक्काग विधित्तदु; इत्तै स्वरूप विश्वासत्तुक्काग विधित्तदु। सरल अनुवाद श्येन … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १३०

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब पूछा गया कि “यह उपासना, जो एक बार निर्धारित की गई थी, पश्चात निषिद्ध क्यों कर दी गई?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक समझाते हैं। सूत्रं – १३० इदुदान् पूर्व विहित हिम्सैपोले विधि निषेधङ्गळ् इरण्डुक्कुम् कुऱै इल्लै। सरल … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १३३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कहते हैं, “इतना ही नहीं, इसका अनुसरण करना भी कठिन है”।  सूत्रं – १३३ इदुदान् कर्म साध्यम् आगैयाले दुष्करुममाय् इरुक्कुम्। सरल अनुवाद क्योंकि यह (भक्ति योग) अनुष्ठानों की सहायता से पूरा किया जाता है, इसलिए इसे … Read more