श्रीवचन भूषण – सूत्रं १४८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका अब, श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी समझाते हैं कि जब चेतन को भगवान की खोज करते देखकर उनकी दया के कारण उसका अधीन होने से अधिक प्रभावशाली/शक्तिशाली है जब सर्वेश्वर के स्वतंत्रता (स्वेच्छा) के कारण चेतन के अधीन होते हैं। … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १४७

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका तत्पश्चात्, श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी एक उदाहरण द्वारा समझाते हैं कि चेतन द्वारा की गई प्रपत्ती को पूर्व कर्मों के विषय में सोचते समय अपराध माना जाएगा। सूत्रं – १४७ नॆडुनाळ्‌ अन्यपरैयाय्प्‌ पोन्द भार्यै, लज्जा भयङ्गळ्‌ इन्ऱिक्के भर्तृ सहाशत्तिले … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १४६

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका इससे पूर्व श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी ने कृपापूर्वक समझाया था कि जब चेतन द्वारा की गई प्रपत्ती भगवान जो कि शरण हैं, उनके दिव्य हृदय के साथ संरेखित नहीं होती है, तो उसे अपराध माना जाएगा; आगे, यह दर्शाने … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १४५

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब उनसे पूछा गया कि “इन व्यक्तित्वों में ये सिद्धांत कैसे दिखाई देते हैं?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक समझाते हैं। सूत्रं – १४५ श्री भरताऴ्वानुक्कु, नन्मैदाने तीमैयाय्त्तु; श्री गुहप्पॆरुमाळुक्कु तीमैदाने नन्मैयाय्त्तु। सरल अनुवाद श्रीभरतजी के लिए अच्छे … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १४४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब उनसे पूछा गया कि “क्या हम इन दो सिद्धांतों [पिछले दो सूत्रों में समझाए गए] को कहीं भी प्रदर्शित होते हुए देख सकते हैं?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक समझाते हैं। सूत्रं – १४४ इवै इरण्डुम, श्री … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १४३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका अब, श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी उस अंतर को समझा रहे हैं जब भगवान स्वयं चेतन को स्वीकार करते हैं। सूत्रं – १४३ अवन्‌ इवनैप्पॆऱ निनैक्कुम्बोदु पातकमुम्‌ विलक्कन्ऱु सरल अनुवाद जब भगवान किसी चेतन को स्वीकार करना चाहते हैं, तो … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १४२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका तत्पश्चात, श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक प्रपत्ती के अनुपायत्व (साधन न होना) और उसके विपरीत, जो परगत स्वीकार (भगवान द्वारा अपनी इच्छा से स्वीकार किया जाना) है, को उपाय (साधन) समझा रहे हैं जिनकी व्याख्या पहले क्रमशः सूत्र ५४ … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १४१

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक प्रपत्ति की महानता की व्याख्या करते हैं (फल और साधन एक ही होने के आधार पर)। सूत्रं  आगैयाले सुख रूपमाय् इरुक्कुम्। सरल अनुवाद अतः प्रपत्ति सुखदायक है। व्याख्या आगैयाले…… अर्थात् – क्योंकि जो सत्ता साध्य … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १४०

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका सूत्रं १३६ “पूर्ण विषयम्” से लेकर यहाँ तक, अतिरिक्त जानकारी दी गई है, किन्तु इससे पहिले प्रपत्ती की महानता का वर्णन किया जा चुका है। अतः प्रपत्ती की एक और महानता समझाने के लिए श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वमीजी कृपापूर्वक सिद्धोपाय … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १३९

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब पूछा गया कि “क्या भगवान के सुलभता से संतुष्ट होने के लिए कोई प्रमाण (शास्त्रों में प्रमाण) है?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी ने तदपश्चात समझाया। सूत्रं – १३९  “पत्रं पुष्पम्”, “अन्यत् पूर्णात्”, “पुरिवदुवुम् पुगै पूवे” सरल अनुवाद श्रीभगवद्गीता … Read more