श्रीवचन भूषण – सूत्रं १५२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम:

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जब उनसे पूछा गया कि “यद्यपि चेतन स्वाभाविक रूप से दास है और भगवान स्वाभाविक रूप से स्वामी हैं, इसलिए दोनों एक-दूसरे के पास सीधे पहुँच सकते हैं। किन्तु वे एक-दूसरे के निकट मध्यस्थों के माध्यम से क्यों जा रहे हैं?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक समझाते हैं।

सूत्रं १५२

इरुवर्‌ मुन्निडुगिऱदुम्‌ तन्दाम्‌ कुट्रङ्गळै शमिप्पिक्कैक्काग।

सरल अनुवाद

दोनों ही मध्यस्थों के माध्यम से एक-दूसरे से संपर्क करते हैं ताकि दूसरे व्यक्ति से अपना दोष सहन किया जा सके।

व्याख्या

इरुवर्‌ …

चेतन की भूल यह है कि भगवान से सदैव दूर रहना, सांसारिक सुखों में लिप्त रहना, भगवान की आज्ञाओं का उल्लंघन करने का संचित अपराध अपने ऊपर रखना; ईश्वर की भूल यह है कि चेतन को उसके अपराध को देखते हुए सदैव दूर धकेलते रहना, जबकि चेतन का ईश्वर के साथ स्वाभाविक संबंध है।

चेतन की भूल को दबाना – चेतन की भूल को देखकर ईश्वर को क्रोध प्रकट न करने देना; ईश्वर की भूल को दबाना – चेतन को ईश्वर के क्रोध के बारे में सोचकर भयभीत न होने देना।

अडियेन् केशव रामानुज दास

आधार: https://granthams.koyil.org/2021/07/06/srivachana-bhushanam-suthram-152-english/

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