श्रीवचन भूषण – सूत्रं १७७
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका इस प्रकार – सूत्रं १४५ “नन्मैताने तीमैयाय्त्तु” (अच्छे गुण हानिकारक हो जाते हैं), सूत्रं १६० “तनक्कुत् तान् तेडुम् नन्मै तीमैयोपादि विलक्काय् इरुक्कुम्” (स्वयं के प्रयासों से अपने लिए अच्छाई ढूँढ़ने का स्वभाव उसी प्रकार त्याग देना चाहिए जैसे … Read more