श्रीवचन भूषण – सूत्रं १५५

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका इतना ही नहीं, इसका एक और लाभ भी है। (पुरुषकार) सूत्रं – १५५ अनित्यमान इरुवर्‌ पारतन्त्र्यमुम्‌ कुलैवदुम्‌ अत्ताले. सरल अनुवाद ऐसे पुरुषकार द्वारा दोनों की अस्थायी पारतन्त्र्यम् (अवलंबित होना) भी नष्ट हो जाएगी। व्याख्या अनित्यमान … अनित्यमान पारतन्त्र्यमुम्‌ … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १५४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी बताते हैं कि उन्होंने पहिले किस बात को “स्वरूप” के रूप में सुनिश्चित  किया था। सूत्रं – १५४ औपाधिकमुमाय्‌ नित्यमुमान पारतन्त्र्यम्‌ इरुवर्क्कुम्‌ उण्डिऱॆ। सरल अनुवाद दोनों की [श्रीजी के प्रति] आकस्मिक और स्वाभाविक निर्भरता है। … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १५३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका इतना ही नहीं, मध्यस्थता का एक अन्य उद्देश्य भी है। सूत्रं – १५३ स्वरूप सिद्धियुम्‌ अत्ताले। सरल अनुवाद  इससे व्यक्ति को अपने वास्तविक स्वरूप का भी ज्ञान होता है। व्याख्या स्वरूप … स्वरूप – चेतन के लिए यह … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १५२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब उनसे पूछा गया कि “यद्यपि चेतन स्वाभाविक रूप से दास है और भगवान स्वाभाविक रूप से स्वामी हैं, इसलिए दोनों एक-दूसरे के पास सीधे पहुँच सकते हैं। किन्तु वे एक-दूसरे के निकट मध्यस्थों के माध्यम से क्यों … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १५१

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब उनसे पूछा गया कि “भगवान ने स्वतंत्र होते हुए भी इन विभूतियों (श्रीहनुमानजी और श्रीनिषादराज) को श्रीलक्ष्मणजी और माता सीता के माध्यम (मध्यस्थ/पुरुषकार) से उनसे सम्पर्क कर स्वीकार किया जैसा कि श्रीरामायण के किष्किन्धा काण्ड ३.२७ में … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १५०

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब उनसे पूछा गया कि “क्या ऐसे कोई व्यक्ति हैं जिनमें कोई कामना नहीं थी, परन्तु भगवान ने उन्हें स्वीकार कर लिया?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक उत्तर देते हैं। सूत्रं – १५० अपेक्ष निरपेक्षमाग तिरुवडिक्कुम्‌ श्री गुहप्पॆरुमाळुक्कुम्‌ … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १४८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका अब, श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी समझाते हैं कि जब चेतन को भगवान की खोज करते देखकर उनकी दया के कारण उसका अधीन होने से अधिक प्रभावशाली/शक्तिशाली है जब सर्वेश्वर के स्वतंत्रता (स्वेच्छा) के कारण चेतन के अधीन होते हैं। … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १४७

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका तत्पश्चात्, श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी एक उदाहरण द्वारा समझाते हैं कि चेतन द्वारा की गई प्रपत्ती को पूर्व कर्मों के विषय में सोचते समय अपराध माना जाएगा। सूत्रं – १४७ नॆडुनाळ्‌ अन्यपरैयाय्प्‌ पोन्द भार्यै, लज्जा भयङ्गळ्‌ इन्ऱिक्के भर्तृ सहाशत्तिले … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १४६

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका इससे पूर्व श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी ने कृपापूर्वक समझाया था कि जब चेतन द्वारा की गई प्रपत्ती भगवान जो कि शरण हैं, उनके दिव्य हृदय के साथ संरेखित नहीं होती है, तो उसे अपराध माना जाएगा; आगे, यह दर्शाने … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १४५

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब उनसे पूछा गया कि “इन व्यक्तित्वों में ये सिद्धांत कैसे दिखाई देते हैं?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक समझाते हैं। सूत्रं – १४५ श्री भरताऴ्वानुक्कु, नन्मैदाने तीमैयाय्त्तु; श्री गुहप्पॆरुमाळुक्कु तीमैदाने नन्मैयाय्त्तु। सरल अनुवाद श्रीभरतजी के लिए अच्छे … Read more