श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम:
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अवतारिका
जब उनसे पूछा गया कि “क्या ऐसे कोई व्यक्ति हैं जिनमें कोई कामना नहीं थी, परन्तु भगवान ने उन्हें स्वीकार कर लिया?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक उत्तर देते हैं।
सूत्रं – १५०
अपेक्ष निरपेक्षमाग तिरुवडिक्कुम् श्री गुहप्पॆरुमाळुक्कुम् इदु उण्डाय्त्तु।
सरल अनुवाद
बिना किसी इच्छा की अपेक्षा के हनुमानजी और श्रीनिषाद राज के लिए यह घटित हुआ।
व्याख्या
अपेक्षा निरपेक्षमाग …
अर्थात् – यद्यपि उनकी कोई इच्छा नहीं थी तब भी पम्पा नदी और गंगा नदी के तट पर भगवान (श्रीराम/पेरुमाळ्) ने स्वयं जाकर हनुमानजी और श्रीनिषाद राज को स्वीकार किया। उन दोनों को यह परगत श्रीविकार (भगवान की स्वीकृति) प्राप्त हुई।
अडियेन् केशव रामानुज दास
आधार: https://granthams.koyil.org/2021/07/04/srivachana-bhushanam-suthram-150-english/
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