यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ४८
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ४७ जैसे श्लोक में कहा गया यानियानिच दिव्यानि देशे देशे जगन्तितेः।तानि तानि सम्स्तानि स्थानि समसेवत॥ (राह में जहाँ जहाँ भगवान दिव्य स्थान पर निवास किये हैं उन्होंने उन सभी स्थानों पर उनके दिव्य चरणों कि पूजा किये) वें राह में सभी स्थानों … Read more