यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग ३

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग २ इन दोनों भाईयों ने कृपाकर तत्वरहस्यम (सच्चे अस्तित्व के रहस्यों के बारे मे) से प्रारम्भ कर कई प्रबंधों कि रचना कि, १०० वर्ष से भी अधिक विराजमान होकर, कई महान जनों ने अपनी जीविका को छोड़ कर श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी के … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग २

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग १ एक दिन श्रीकलिवैरिदास स्वामीजी अपने दिन नित्य कालक्षेप करने के पश्चात अकेले विश्राम कर रहे थे जब अम्मी, उनके एक शिष्य वडक्कु तिरुवीदिप्पिळ्ळै (श्रीकृष्णपादर् स्वामी) की माताजी दण्डवत प्रणाम कर उनके बगल में खड़ी हो गयी। उन्होंने बड़ी करुणा से … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग १

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << तनियन श्रीय:पति, श्रीमहालक्षमीजी के पति, बड़ी कृपा कर आल्वार श्रीशठकोप स्वामीजी, श्रीपरकाल स्वामीजी, श्रीविष्णुचित्त स्वामीजी जैसे महानों को इस संसार में हम सांसारियों (भोगार्थी) को कलियुग कि नरक से मुक्त करने हेतु अवतरित किया। तत्पश्चात् उन्होने कृपा कर श्रीनाथमुनि स्वामीजी और श्रीयामुनाचार्य … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – तनियन

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम श्रीशैलेशदयापात्रं धीभक्त्यादि गुणार्णवम् । यतीन्द्रप्रवणं वन्दे रम्यजामातरं मुनिम् ॥ (मैं रम्यजामातरं मुनि (श्रीवरवरमुनि स्वामीजी) को पूजता हूँ जो श्रीशैलेश स्वामीजी के कृपा पात्र हैं, जो गुणों के समुन्द्र हैं जैसे ज्ञान, भक्ति, आदि और जिन्हें भगवद श्रीरामानुज स्वामीजी (यतियों के राजा) के प्रति … Read more

अन्तिमोपाय निष्ठा – १३ – आचार्य अपचार।

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः अन्तिमोपाय निष्ठा << आचार्य भगवान् के अवतार हैं पिछले लेख (अन्तिमोपाय निष्ठा – १२ – आचार्य भगवान् के अवतार हैं।) में हमने देखा कि आचर्य भगवान के अवतार होते हैं और उन्हें केवल ऐसा ही माना जाना चाहिए। लेख के इस भाग में, आचर्य … Read more

लोकाचार्य स्वामीजी की दिव्य-श्रीसूक्तियां – १३

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचलमहामुनये नमः लोकाचार्य स्वामीजी की दिव्य-श्रीसूक्तियां << पूर्व अनुच्छेद 121) शिष्यनुक्कु आचार्यानुवर्त्तनम् पण्णलावदु अवन् देह परिग्रहम् पण्णियुरुक्किर नाळिलेयिरे।पिन्भुळ्ळत्तेल्लाम् भगवदनुभवत्तिले अन्यविक्कुमिरे इरुवर्कुम् ।                         अनुवर्त्तनम् – आज्ञा पालन और सेवा करना, पिन्बु – परमपद पहुँचकर इस … Read more

विरोधी परिहारंगल (बाधाओं का निष्कासन)- निष्कर्ष

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रीवादिभीकरमहागुरुवे नमः “श्रीवैष्णवों को अपने दैनिक जीवन में कैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है इसका उपदेश श्रीरामानुज स्वामीजी ने वंगी पुरत्तु नम्बी को दिया। वंगी पुरत्तु नम्बी ने उसपर व्याख्या करके “विरोधी परिहारंगल (बाधाओं को हटाना)” नामक ग्रन्थ के रूप में प्रस्तुत किया। … Read more

विरोधी परिहारंगल (बाधाओं का निष्कासन-४६)

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रीवादिभीकरमहागुरुवे नमः “श्रीवैष्णवों को अपने दैनिक जीवन में कैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है इसका उपदेश श्रीरामानुज स्वामीजी ने वंगी पुरत्तु नम्बी को दिया। वंगी पुरत्तु नम्बी ने उसपर व्याख्या करके “विरोधी परिहारंगल (बाधाओं को हटाना)” नामक ग्रन्थ के रूप में प्रस्तुत किया। … Read more

विरोधी परिहारंगल (बाधाओं का निष्कासन) – ४५

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रीवादिभीकरमहागुरुवे नमः “श्रीवैष्णवों को अपने दैनिक जीवन में कैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है इसका उपदेश श्रीरामानुज स्वामीजी ने वंगी पुरत्तु नम्बी को दिया। वंगी पुरत्तु नम्बी ने उसपर व्याख्या करके “विरोधी परिहारंगल (बाधाओं को हटाना)” नामक ग्रन्थ के रूप में प्रस्तुत किया। … Read more

विरोधी परिहारंगल (बाधाओं का निष्कासन) – ४४

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रीवादिभीकरमहागुरुवे नमः “श्रीवैष्णवों को अपने दैनिक जीवन में कैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है इसका उपदेश श्रीरामानुज स्वामीजी ने वंगी पुरत्तु नम्बी को दिया। वंगी पुरत्तु नम्बी ने उसपर व्याख्या करके “विरोधी परिहारंगल (बाधाओं को हटाना)” नामक ग्रन्थ के रूप में प्रस्तुत किया। … Read more