श्रीवचन भूषण – सूत्रं २ 

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी शृंखला पूर्व अवतारिका  श्रीपिळ्ळैलोकाचार्य  स्वामीजी दयापूर्वक यह जान रहे हैं कि वेदों के किस खंड को उपर्युक्त साहित्य मे से किस भाग द्वारा निर्धारित किया जाना हैं।  सूत्रं २  स्मृतियाले पूर्व भागत्तिल अर्थम् अऱुदिइडक्कडवदु; मट्रै इरण्डालुम् उत्तर भागत्तिल अर्थम् अऱुदियिडक्कडवदु।  सरल … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं १ 

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी शृंखला पूर्व अवतारिका  एक प्रमाता (शिक्षक को ग्तान प्रस्तुत करता हैं) प्रमाण (ज्ञान का स्रोत) के साथ हीं प्रमेय (ज्ञान का लक्ष्य) निर्धारित करता हैं। ऐसे प्रमाण प्रत्यक्षं से प्रारम्भ कर ८ प्रकार के हैं।  प्रत्यक्षम् एकं चार्वाकाः कणाद सुगदौ पुनः।अनुमानञ्च तच्छात … Read more

श्रीवचन भूषण – अवतारिका – भाग ३ 

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी शृंखला पूर्व​ अब हम अवतारिका के अंतिम भाग को जारी रखेंगे। इस खंड में श्रीवरवरमुनि स्वामीजी समझाते हैं कि श्रीवचन भूषण द्वय महा मन्त्र को विस्तार से समझाते हैं जैसे कि श्रीसहस्रगीति में किया गया हैं।  श्रीशठकोप स्वामीजी श्रीसहस्रगीति जिसे दीर्घ … Read more

श्रीवचन भूषण – अवतारिका – भाग २ 

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला पूर्व अवतारिका के अगले भाग में हम अब आगे बड़ते हैं। इस अवतारिका के खंड में श्रीवरवरमुनि स्वामीजी इस प्रबन्ध के लिये दो प्रकार के वर्गीकरण (६ खंड और ९ खंड) बताते हैं।  श्रीपिळ्ळैलोकाचार्यर्, श्रीवरवरमुनि स्वामीजी – श्रीपेरुम्बुतूर् पहिले हम देखेंगे … Read more

श्रीवचन भूषण – अवतारिका – भाग १ 

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: श्रीवचन भूषण​ << तनियन् तिरुमन्त्र सम्पूर्ण वेद का सार हैं। तिरुमन्त्र में ३ शब्द ३ सिद्धान्तों को प्रकाशित करता हैं (अनन्यार्ह शेषत्व – केवल भगवान के शेष होकर रहना, अनन्य शरणत्व – उन्हीं के सर्वविध शरण रहना, अनन्य भोग्यत्व – भगवान के … Read more

श्रीवचन भूषण – तनियन्

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: श्रीवचन भूषण​ श्रीवचन भूषण का पाठ / अध्ययन करने से पूर्व निम्म तनियन का पाठ करने कि प्रथा हैं। हम अपने गौरवशाली आचार्य और सभी के हित के लिये उनके साहित्यिक योगदान को समझने हेतु उन्हें संक्षेप में देखेंगे। पहिले श्रीशैलेश दयापात्रं … Read more

आऴ्वार्/आचार्यों के तिरुनक्षत्र

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद वरवरमुनये नमः क्योंकि हम सारे आऴ्वार और आचार्यों के कृतज्ञ हैं, हम सभी को उनके तिरुनक्षत्रों का स्मरण कर मनाना चाहिए। साल भर उनके तिरुनक्षत्र दिनों की सूची नीचे प्रस्तुत है। अडियेन् वैष्णवी रामानुज दासी आधार: https://granthams.koyil.org/2023/05/22/azhwar-acharyas-thirunakshathrams-tamil/ प्रमेय (लक्ष्य) – https://koyil.orgप्रमाण (शास्त्र) – https://granthams.koyil.orgप्रमाता (आचार्य) – https://acharyas.koyil.orgश्रीवैष्णव … Read more

१०८ दिव्यदेशम् (दिव्यक्षेत्र)

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमःश्रीमद वरवरमुनये नमः सर्वेश्वर श्रीमन्नारायण के दिव्य स्थल जो आऴ्वारों द्वारा गाए गए हैं, उन्हें दिव्यदेशम् कहते हैं। ये सारे स्थल एम्पेरुमान् के लिए अति प्रिय हैं और इसलिए इन्हें कहते हैं “उगन्दरुळिन निलंङ्गळ्” (भगवान प्रसन्न क्षेत्र)। चोऴ नाडु (श्रीरङ्गम् के निकट) नडु नाडु (मध्य तमिऴनाडु) तोन्डै नाडु (चेन्नई … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग १०८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग १०७ श्रीमद उभयवेदान्ताचार्य काञ्चीपुरम् के श्रीप्रतिवादि भयङ्करम् अण्णङगराचार्य द्वारा दी गई व्याख्या  यह श्लोक श्रीशैलेश दयापात्रम् कृपाकर श्रीरङ्गनाथ भगवान ने रचा हैं। हम यह पुष्टि करेंगे कि यह भगवान कि वाणी हैं। यह श्रीरङ्गनाथ भगवान हीं थे जिन्होंने श्रीराम और श्रीकृष्ण के … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग १०७

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग १०६ अब यतीन्द्र और यतीन्द्र प्रवणर के मध्य में समानता:  श्रीरामानुज स्वामीजी श्रीपेरुम्बुतूर में अवतरित हुए जो श्रीरङ्गम् के उत्तर दिशा में स्थित हैं, ताकि संस्कृत और तमिऴ् भाषा दोनों को उजागर किया जा सके। उनके अवतार के कारण “नारणनैक् काट्टिय वेदम् … Read more