यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ९६
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ९५ श्रीवरवरमुनि स्वामीजी का श्रीवैकुण्ठ जाने के लिये आग्रह श्रीवानमामलै जीयर् स्वामीजी के कुछ दिनों के जाने के पश्चात श्रीवरवरमुनि स्वामीजी को पुनः प्राप्य भूमि (श्रीवैकुंठ) कि ओर स्नेह हुआ, त्याज्यभूमि (संसार) के प्रति घृणा हुआ और भगवान के अनुभव के अभाव … Read more