यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ९७
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ९६ जब श्रीवरवरमुनि स्वामीजी ऐसे स्थिति में थे तब मेल्नाट्टुत् तोऴप्पर् और उनके भ्राता अऴगिय मणवाळप्पेरुमाळ् नायनार् जीयर् कृपाकर श्रीरङ्गनाथ भगवान कि पूजा करने हेतु श्रीरङ्गम् में पधारे। श्रीभट्टर्पिरान् जीयर् स्वामीजी उन्हें तेन्माडवीदी (आज के समय में तेऱ्कु उत्तर वीथी) में मिले … Read more