यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ९६

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ९५ श्रीवरवरमुनि स्वामीजी का श्रीवैकुण्ठ जाने के लिये आग्रह  श्रीवानमामलै जीयर् स्वामीजी के कुछ दिनों के जाने के पश्चात श्रीवरवरमुनि स्वामीजी को पुनः प्राप्य भूमि (श्रीवैकुंठ) कि ओर स्नेह हुआ, त्याज्यभूमि (संसार) के प्रति घृणा हुआ और भगवान के अनुभव के अभाव … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ९५

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ९४ उन सभी गतिविधियों के साथ जो उनके दिव्य अवतार के परिणाम स्वरूप पूरी होनी थीं सम्पन्न होगये, श्रीवरवरमुनि स्वामीजी श्रीवैकुण्ठ जाने के इच्छुक थे जहां अथक नित्यसुरियों के स्वामी निवास करते हैं। वें सभी के उस तेजोमय मूल के सुंदर रूप … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ९४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ९३ पेरीय जीयर्, जो ऐसे शिष्यों द्वारा पूजे गये हैं, जिन्होंने संसार के लोगों को अर्थ पञ्चकम् (स्वयं को जानने के पाँच तत्त्व, भगवान को जानना, भगवान को प्राप्त करने का उपाय, भगवान को पाने का महानतम लाभ और भगवान तक पहुँचने … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ९३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ९२ श्रीवरवरमुनि स्वामीजी कृपाकार आचार्य हृदयम् पर व्याख्या लिखते हैं  तत्पश्चात अपने दिव्य शरीर के कमजोरी पर ध्यान ने देते हुए श्रीवरवरमुनि स्वामीजी अपने दिव्य मन में आचार्य हृदयम् (एक प्रबन्ध जिसे श्रीपिळ्ळैलोकाचार्य स्वामीजी के अनुज अऴगियमणवाळप्पेरुमाळ् नायनार्​ ने रचा था) पर … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ९२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ९१ दिव्यदेशों में शिष्यों के माध्यम से कैङ्कर्य करते हैं  तत्पश्चात महाबली वाणनाथन जिन्होंने श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के दिव्य चरणों में शरण ली थी, ने तिरुमालै तन्दान् तोऴप्पर् (तिरुमालै तोऴप्पर्) को प्रार्थमिक व्यक्ति के रूप में रखते हुए, तिरुमालिरुञ्चोलै दिव्यदेश में सभी प्रकार … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ९१

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ९० श्रीवरवरमुनि स्वामीजी कृपाकर श्रीरङ्गम् लौटते हैं  श्रीवरवरमुनि स्वामीजी तिरुमालिरुञ्चोलै से प्रस्थान कर कृपाकर उस स्थान पर पहुँचते हैं जहां तिरुमालिरुञ्चोलै के स्वामी नित्य रात्री को शयन करते हैं, श्रीरङ्गम् [श्रीरङ्गम् वह दिव्य स्थान हैं जहां सभी दिव्यदेश के भगवान हर रात्री … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ९०

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ८९ जीयर् कोयिल के अनुभव की कमी के लिए दुःखित थे। जबकी श्रीवरवरमुनि स्वामीजी आऴ्वार्तिरुनगरि में विराजमान थे मार्गशीष महिना (धनुर्मास) प्रारम्भ हुआ। श्रीवरवरमुनि स्वामीजी बहुत दुखी हुए कि वें श्रीरामानुज स्वामीजी कि तिरुप्पावै [श्रीरामानुज स्वामीजी तिरुप्पावै से बड़ी गहराई से जुड़े … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ८९

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ८८ महाबली वाणनाथरायन् श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के शरण लेते हैं  जब श्रीवरवरमुनि स्वामीजी मधुरै में थे तब वहाँ के राजा महाबली वाणनाथरायन् श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के सम्पर्क में आए और उनके दिव्य चरणों के शरण हुए। श्रीवरवरमुनि स्वामीजी ने अपनी निर्हेतुक कृपा राजा पर … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ८८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ८७ मधुरकवि स्वामीजी के निष्ठा के जैसे श्रीगोविन्द दास अप्पन्  फिर एक दिन जब सभी जन श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के मठ में एक साथ इकट्ठे हुए थे, हालांकी सभी यह जानते थे कि श्रीवरवरमुनि स्वामीजी ने कहा कि “तेवुमट्रऱियेन्” (दास ओर कोई देवता … Read more

आल्वार तिरुनगरी वैभव – उत्सव

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: आल्वार तिरुनगरी वैभव << सन्निधी प्रतिदिन ताम्रपर्णी नदी से जल लाकर श्रीशठकोप स्वामीजी का तिरुमंजन करते हैं। पूर्ण: वर्ष में भगवान, अम्माजी, आलवार और आचार्य के कई उत्सव होते हैं। हम इस विषय में अब अधीक सीखेंगे। प्रति माह में होनीवाली पालकी … Read more