श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः
अवतारिका (परिचय)
इनके लक्ष्य यहाँ समझाए किए गए हैं।
चूर्णिका -२९
अरुळ् मुडिय निऱुत्ति अडैय निन्ऱदुम् नल्लदोररुळ् तन्नाले नन्ऱुम् ऎळियनागिऱदुम् विषयम्।
सरल व्याख्या
कर्म का विषय है देवताएँ जो ईश्वर द्वारा नियुक्त किए गए हैं और जिनमें अंतर्यामी रूप में भगवान कृपापूर्वक वास करते हैं। कैङ्कर्य का विषय है भगवान का अर्चावतार (अर्चा विग्रह) जिसमें भगवान अपनी कृपा से अत्यंत सुलभ होकर रहते हैं।
व्याख्या
जैसे कि नान्मुगन् तिरुवन्दादि २ में वर्णित है “ऎत्तवम् सॆय्दार्क्कुम् अरुळ् मुडिवदु अऴियान्पाल्” (जो चाहे जिसकी भी सीमा तक तप करने वाले हों, उन्हें दिव्य चक्रधारी भगवान के अनुग्रह का अन्तिम फल उन्हीं के द्वारा प्रदान होता है), भगवान के शरणागत होने का फल प्रदान भगवान द्वारा ही होता है, भगवान ने स्वयं के लिए देवताओं को प्रस्तुत किया, जो सब भगवान के ही विभिन्न आकार हैं, जैसे कि तिरुवाय्मोऴि ५.२.८ “तन् मूर्त्ति निऱुत्तिनान् दॆय्वङ्गळाग” (उन्होंने अपने विभिन्न रूपों या शरीर के रूप में पूजनीय देवताओं का प्रस्तुतीकरण किया); ऐसे देवताओं के समक्ष जो चेतन शास्त्रानुसार शरणागत होते हैं एवं फल प्राप्त करते हैं, भगवान ऐसे देवताओं के अन्तर्यामी होकर उन चेतनाओं को वह फल प्रदान करते हैं, और वही कर्म का विषय है।
जैसे कि तिरुमालै १० में “नल्लदोर् अरुळ् तन्नाले काट्टिनान् तिरुवरङ्गम्” (अपनी अतुलनीय कृपा विशेष के साथ उन्होंने श्रीरङ्गम् का दर्शन कराया) और तिरुवाय्मोऴि ३.६.११ में कहा गया है “करुत्तुक्कु नन्ऱुम् ऎळियनाय्” (हृदय के लिए अनुभव का विस्तार रूप का विषय), उनकी अनन्य कृपा से, अत्यन्त सहज व सुलभ होकर अर्चावतार के रूप में रहना ही कैङ्कर्य का विषय है।
अडियेन् अमिता रामानुज दासी
आधार – https://granthams.koyil.org/2024/03/24/acharya-hrudhayam-29-english/
संगृहीत- https://granthams.koyil.org/
प्रमेय (लक्ष्य) – https://koyil.org
प्रमाण (शास्त्र) – https://granthams.koyil.org
प्रमाता (आचार्य) – https://acharyas.koyil.org
श्रीवैष्णव शिक्षा/बालकों का पोर्टल – https://pillai.koyil.org