श्रीवचन भूषण – सूत्रं १७९

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जब पूछा गया, “क्या वह स्वयं को नष्ट कर लेगा?” तो श्री पिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी ने दयापूर्वक उत्तर दिया।

सूत्रं – १७९

तन्नैत्‌ तानेयिऱे मुडिप्पान्‌।

सरल अनुवाद

वह स्वयं को नष्ट कर देगा। 

व्याख्या

तन्नैत्‌ ताने…

अर्थात्, क्योंकि सर्वेश्वरन् सदा चेतन को उद्धार करने के लिए तत्पर रहते हैं, वे कभी भी चेतन के विनाश का कारण नहीं बनते। इसलिए, चेतन स्वयं अपना विनाश करता है, जैसा कि तैत्तिरीय उपनिषद् में “असन्नेव” (अचित् के समान) कहा गया है।

श्रीसहस्रगीति २.९.९ “याने ऎन्नै में, आऴ्वार् “याने” (केवल मैं ही) कहकर यह दर्शाते हैं कि “मेरा पतन भगवान् के कारण नहीं हुआ। वे तो श्रीसहस्रगीति २.७.६ ऎदिर्‌ सूऴल्‌ पुक्कु” (युक्तियों के साथ मेरे पास आकर मुझे बचाने का प्रयास करते हुए) के अनुसार मेरी सहायता करने का प्रयत्न कर रहे थे; परन्तु मैंने स्वयं अपना विनाश कर लिया।”

अडियेन् केशव रामानुज दास

आधार – https://granthams.koyil.org/2021/08/02/srivachana-bhushanam-suthram-179-english/

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