श्रीवचन भूषण – सूत्रं २०५

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम:

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श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी इस प्रश्न का करुणापूर्वक समाधान प्रदान करते हैं कि क्या जन्म, आचरण आदि के आधार पर कोई निषेध या सीमा निर्धारित है।

सूत्रं – २०५

इदिल्‌ जन्म वृत्तादि नियमम्‌ इल्लै।

सरल अनुवाद

जन्म, आचरण आदि के आधार पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

व्याख्या

इदिल्‌ …

इदिल्‌

पिछले सूत्र में बताए गए दो पक्षों के लिए “पेट्रुक्कु अवर्गळ्‌ पक्कल्‌ सम्बन्धमे अमैगिऱाप्पोले, अवै उण्डानालुम्‌ इऴवुक्कु अवर्गळ्‌ पक्कल्‌ अपचारमे पोरुम्‌” (भागवतों के साथ सम्बन्ध लक्ष्य की ओर ले जाएगा और उनके प्रति अपचार से विनाश होगा)।

जन्म वृत्तादि नियमम्‌ इल्लै

इन विषयों में कोई भी निषेध-सीमा प्रवर्तित नहीं होती।

• जन्म, आचरण आदि में श्रेष्ठ भागवतों के साथ सम्बन्ध ही परम लक्ष्य तक पहुँचाने वाला साधन है।
• जन्म, आचरण आदि में निम्न कोटि के भागवतों के साथ सम्बन्ध स्थापित करने से परम लक्ष्य की प्राप्ति नहीं होती।
• जन्म, आचरण आदि में श्रेष्ठ भागवतों के प्रति किया गया अपचार केवल हानि ही उत्पन्न करता है।
• जन्म, आचरण आदि में निम्न कोटि के भागवतों के प्रति किया गया अपराध कोई अनर्थ उत्पन्न नहीं करता है।

अडियेन् केशव रामानुज दास

आधार – https://granthams.koyil.org/2021/08/29/srivachana-bhushanam-suthram-205-english/

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