आचार्य हृदयम् – ११

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नमः  श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – १० अवतारिका (परिचय) इन दोनों सम्बन्धों का प्रभाव आत्मा पर जो पड़ता है यहाँ वर्णित है। चूर्णिका – ११ इवै किट्टमुम् वेट्टुवेळानुम् पोले ऒण् पॊरुळ् पॊरुळ् अल्लाद ऎन्नादे नानिलाद यानुम् उळनावन् ऎन्गिऱ रहस्य चतुष्टयम् साम्यम् पॆऱत् तिन्ऱूदि अन्दमुम् वऴ्वुमागिऱ हानि … Read more

आचार्य हृदयम् – १०

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नमः  श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – ९ अवतारिका (परिचय) अज्ञान (आत्मा का) और करुणामय हृदय (भगवान का) के कारण समझाये हैं। चूर्णिका – १० एतन्निमित्तम् मुन्नमे मुदल् मुन्नमेयान अचित् अयन अनादि सम्बन्दङ्गळ्। सामान्य व्याख्या आत्मा का अचित (प्रकृति/तत्व) और अयन (भगवान/धाम) के साथ अनादि काल से … Read more

आचार्य हृदयम् – ९

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नमः  श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – ८ अवतारिका (परिचय) इनके कारण ये बताए गए हैं। चूर्णिका – ९ कर्मकृपाबीजम् पॊय्न्निन्ऱ अरुळ् पुरिन्द ऎन्गिऱ अविद्या सौहार्दङ्गळ् । सामान्य व्याख्या कर्म का कारण अर्थात् आत्मा का अज्ञान (अविद्या) है और कृपा का मूल कारण अर्थात्  भगवान का कृपालु … Read more

आचार्य हृदयम् – ८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नमः  श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – ७ अवतारिका (परिचय) इनके कारणों को बताया गया है। चूर्णिका – ८ इवट्रुक्कु मूलम् इरुवल्लरुळ् नल्विनैगळ् सामान्य व्याख्या भगवान के कृपा कटाक्ष (कृपा दृष्टि) जन्म के समय और जन्म (बिना कृपाकटाक्ष के) का कारण भी भगवान की कृपा ही है … Read more

आचार्य हृदयम् – ७

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नमः  श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – ६ अवतारिका (परिचय) यह सत्व, रज और तम इन गुणों के होने का कारण बताता है। चूर्णिका – ७ सत्व असत्व निदानम् इरुळ् तरुम् अमलङ्गळाग एन्नुम् जन्म जायमान काल कटाक्षङ्गळ। सामान्य व्याख्या इस संसार में जन्म के समय भगवान की … Read more

आचार्य हृदयम् – ६

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नमः  श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – ५ अवतारिका (परिचय) जब यह प्रश्न पूछा गया, “इस अज्ञानता का मूल कारण क्या है?” तब इसका स्पष्टीकरण यहां दिया गया है। चूर्णिका – ६ इवट्रुक्कु कारणम् इरण्डिल् ऒन्ऱिनिल् ऒन्ऱुगैगळ्। सामान्य व्याख्या इसका (ज्ञान और अज्ञान का) कारण रजस और … Read more

आचार्य हृदयम् – ५

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नमः  श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – ४ अवतारिका (परिचय) इस सूत्र में जीवात्मा को प्राप्त होने वाले ऐसे सुख और दु:ख का कारण समझाया है। चूर्णिका – ५ अनन्तक्लेश निरतिशयानन्द हेतु – मऱन्देन् अऱियगिलादे उणर्विलेन् एणिलेन् अयर्तॆन्ऱुम् उय्युम् वगै निन्ऱवॊन्ऱै नन्गऱिन्दनन् उणर्विनुळ्ळे आम्बरिसॆन्ऱुम् सॊल्लुगिऱ ज्ञातव्य पञ्चक … Read more

आचार्य हृदयम् – ४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नमः  श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – ३ अवतारिका (परिचय) क्योंकि यह सुख और दु:ख प्रत्येक के कर्म और परिस्थिति के परिणामस्वरूप होते हैं, इसलिए यहाँ चरम सीमा की व्याख्या है। चूर्णिका-४ इवट्रुक्कु ऎल्लै इनबुतुन्बळि पन्मामायत्तु अऴुन्दुगैयुम् कळिप्पुम् कवर्वुमट्रुप् पेरिन्बत्तु इन्बुऱुगैयुम् सामान्य व्याख्या इस भौतिक संसार में … Read more

आचार्य हृदयम् – ३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – २ अवतारिका (परिचय) यहाँ यह बताया है कि क्या त्यागना होगा और क्या गृहण करना है। चूर्णिका ३ त्याज्योपादेयङ्गळ् सुक दुक्कङ्गळ् सामान्य व्याख्या  सुख को स्वीकारना है और दु:ख को‌ त्यागना है। व्याख्यान (टीका टिप्पणी) इसका अर्थ … Read more

आचार्य हृदयम् – २

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – १ अवतारिका (परिचय) ऐसे विवेक (अन्तर करने की क्षमता) का फलस्वरूप यहाँ समझाया है। चूर्णिका-२ विवेक पलम् वीडु पट्रु सामान्य व्याख्या यह भेद करने की क्षमता का फल है कि त्यागने के योग्य का त्याग करना और … Read more