आचार्य हृदयम् – २५

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः  श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – २४ अवतारिका (परिचय) जब प्रश्न किया गया कि, “परंतु जो लोग कैङ्कर्य में लगे हुए हैं, उनके लिए भी शेषत्व और भोक्तृत्व है, उनका उद्देश्य क्या है”, इसका उत्तर इस प्रकार यहाँ दिया गया। चूर्णिका – २५ मुऱ्-पाडर्क्कु क्रियाङ्गमानवै इरण्डुम् सॆयल्  तीर्न्दार् … Read more

आचार्य हृदयम् – २४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः  श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – २३ अवतारिका (परिचय) तत्पश्चात्, जैसे कि चूर्णिका १९ “शास्त्रिगळ्..” में वर्णित है, जो प्रवृत्तिपरार् (कर्मों में संलग्न) और निवृत्तिपरार् ([अनावश्यक] कर्मों को त्यागने वाले) कहे गए हैं, जिनके पास क्रमशः स्वरूप ज्ञान और स्वरूप याथात्म्य ज्ञान है ऐसे सुयोग्य पुरुषों को क्या … Read more

आचार्य हृदयम् – २३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः  श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – २२ अवतारिका (परिचय) इस तर्कानुसार, पारतन्त्र्य आदि जो स्वरूप यथात्म्य ज्ञान अवस्था (स्वयं के आंतरिक वास्तविक स्वरूप का ज्ञान होना) में दर्शाए गए हैं, उन गुणों के द्वारा स्वरूप ज्ञान अवस्था (स्वयं के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान होना) में दर्शाए गए शेषत्व … Read more

आचार्य हृदयम् – २२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः  श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – २१ अवतारिका (परिचय) नायनार् इस मूलतत्त्व को तिरुमन्त्र में दर्शा रहे हैं (जिसे पिछली चूर्णिका में समझाया गया था) जो स्वरूप याथात्म्य (आत्मा का आंतरिक सच्चा स्वरूप) को प्रकट करता है। तिरुमन्त्र की संक्षिप्त व्याख्या इस चूर्णिका को सुचारू रूप से समझने … Read more

आचार्य हृदयम् – २१

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः  श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – २० अवतारिका (परिचय) आत्मा के सर्वस्वरूप के ज्ञान में दो भिन्न-भिन्न स्तरों का ज्ञान होता है – स्वरूप ज्ञानम् (सत्य स्वरूप का ज्ञान) और स्वरूप यथात्म्य ज्ञानम् (आन्तरिक सत्य स्वरूप का ज्ञान)। उसमें आत्मा के शेषत्वम् (दासत्व) और ज्ञातृत्वम् (ज्ञाता होने से) … Read more

आचार्य हृदयम् – २०

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः  श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – १९ अवतारिका (परिचय) वे जन (शास्त्री जो शास्त्र में पारङ्गत हैं) और सारज्ञों (शास्त्र के सार के ज्ञाता) द्वारा इन अवस्थाओं (स्वयं का प्रयास सहित भगवान की कृपा पर निर्भर रहने की अवस्था, और भगवान पर पूर्णाश्रित रहने की अवस्था) को … Read more

आचार्य हृदयम् – १९

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – १८ अवतारिका (परिचय) अब, उन मुमुक्षुओं के स्वरूपों की व्याख्या की गई है जो शास्त्रों के और शास्त्रों के सार के अनुयायी हैं। चूर्णिका -१९ शास्त्रिगळ् तॆप्पक्करैयरैप्पोले इरण्डैयुम् इडुक्किप् पिऱविक्कडलै नीन्द सारज्ञर् विट्टत्तिलिरुप्पारैप् पोले इरुकैयुम् विट्टुक् … Read more

आचार्य हृदयम् – १८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – १७ अवतारिका (परिचय) “शास्त्र और तिरुमन्त्र, जो शास्त्र का सार है, क्या योग्य पात्र के या सभी के अनुसरण करने हेतु सुलभ है?” इस प्रश्न का उत्तर यहाँ दिया गया है। चूर्णिका १८ तोल् पुरैये पोमदुक्कुप् … Read more

आचार्य हृदयम् – १७

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – १६ अवतारिका ( परिचय) इस प्रकार, पिछली चूर्णिका में यह बताया गया कि भगवान ने कृपापूर्वक संसारी चेतनों (बद्ध आत्माओं) का उद्धार करने के लिए शास्त्र और तिरुमन्त्र का प्रकटीकरण किया, जो कि उन शास्त्रों का सार … Read more

ఆచార్య హృదయం – 92

ఆచార్య హృదయం << చూర్ణిక 91 చూర్ణిక  92 అవతారికజ్ఞానులు అయినప్పటికీ ఆళ్వారు యొక్క స్వరూపమును గుర్తించలేక ఆశ్చర్యచకితులై “ఈ విధముగా ఆళ్వారులా ఎవరు అవతరించి ఉంటారు?” అని ఆళ్వార్ల స్వరూపమును ఏ విధముగా శంకించెదరు అన్న విషయమును ఇక మీద నాయనార్లు కృప చేయుచున్నారు. చూర్ణికఅత్రి జమదగ్ని పంక్తిరధ వసునన్ద సూనువానవనుడైయ యుగ వర్ణ క్రమావతారమో? వ్యసాదివదావేశమో? మూతువర్ కరైకణ్డోర్ శీరియరిలే యొరువరో మున్నమ్ నోత్త అనన్దన్ మేల్ పుణ్ణియఙ్గళ్ ఫలిత్తవరో ఎన్ఴు శఙ్కిప్పర్ కళ్ … Read more