यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ३७
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ३६ श्रीवरवरमुनि स्वामीजी कृपाकर श्रीपेरुम्बुदूर् के लिये प्रस्थान किये तत्पश्चात श्रीवरवरमुनि स्वामीजी श्रीपेरुम्बुदूर् के लिये प्रस्थान किये जैसे कि इस श्लोक में उल्लेख हैं यतीन्द्रत्जननीम्प्राप्य पुरीं पुरुषपुङ्गवः।अन्तः किमपि सम्पश्यन्नत्राक्षीः लक्ष्म्णं मुनिम्॥ (पुरुषों में सबसे उत्तम श्रीवरवरमुनि स्वामीजी, श्रीरामानुज स्वामीजी के जन्म स्थान … Read more