प्रपन्नामृत – अध्याय ३२
प्रपन्नामृत – अध्याय ३२ श्रीभाष्य का निर्माण 🔸एक दिन रामानुजाचार्य को श्री यामुनाचार्यजी के वैकुंठगमन के समय अंगुली मोचन के लिये की गयी “श्रीभाष्य” के रचना की प्रतिज्ञा का स्मरण हुवा। 🔸इसके लिये आवश्यक “बोधायन वृत्ति” ग्रंथ प्राप्त करनेके लिये श्रीकुरेश को साथ लेकर काश्मीर के शारदापीठ आये। 🔸 सरस्वतीजी ने उन्हे यह ग्रंथ दिया … Read more