ಕೃಷ್ಣ ಲೀಲೆಗಳ ಸಾರಾಂಶ – 2 – ಪೆರಿಯಾಳ್ವಾರ್ ಕೃಷ್ಣಾನುಭವ / ಶ್ರೀಕೃಷ್ಣನ ಜನ್ಮೋತ್ಸವ

ಶ್ರೀಃ ಶ್ರೀಮತೇ ಶಠಕೋಪಾಯ ನಮಃ ಶ್ರೀಮತೇ ರಾಮಾನುಜಾಯ ನಮಃ ಶ್ರೀಮದ್ವರವರಮುನಯೇ ನಮಃ ಶ್ರೀವಾನಾಚಲ ಮಹಾಮುನಯೇ ನಮಃ ಕೃಷ್ಣ ಲೀಲೆಗಳ ಸಾರಾಂಶ << ಶ್ರೀಕೃಷ್ಣನ ಜನನ ಪೆರಿಯಾಳ್ವಾರ್, ತಾಯಿ ಯಶೋದೆಯ ಮಾತೃಭಾವದಲ್ಲಿ, ಶ್ರೀಕೃಷ್ಣನ ಲೀಲೆಗಳನ್ನು ಆನಂದಿಸಿದರು ಮತ್ತು ಸುಂದರವಾದ ಪಾಶುರಗಳ ರೂಪದಲ್ಲಿ ನಮಗೆ ಪ್ರಸ್ತುತಪಡಿಸಿದರು. ಅವರ ಪೆರಿಯಾಳ್ವಾರ್ ತಿರುಮೊಳಿಯಲ್ಲಿ ಹಲವು ಪದಿಗಗಳಲ್ಲಿ ಅವರು ಶ್ರೀಕೃಷ್ಣನ ಅನೇಕ ಲೀಲೆಗಳನ್ನು ಆನಂದಿಸಿದರು ಮತ್ತು ಅವುಗಳನ್ನು  ವಿಸ್ತಾರವಾಗಿ ವಿವರಿಸಿದರು. ಪೆರಿಯಾಳ್ವಾರ್ ತಿರುಮೊಳಿಯಲ್ಲಿ “ವಣ್ಣ ಮಾಡಙ್ಗಳ್ ಶೂಳ್ ತಿರುಕ್ಕೋಟ್ಟಿಯೂರ್ ಕಣ್ಣನ್ ಕೇಶವನ್ ನಮ್ಬಿಪಿರನ್ದನಿಲ್, ಎಣ್ಣೆಯ್ ಶುಣ್ಣಮ್ … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार- २६ – अक्रूर जी की यात्रा

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << कंस‌ का भयभीत होना और षड्यंत्र कंस ने श्रीकृष्ण और बलराम को लाने के लिए अक्रूर जी को भेजा। प्रभात वेला में ही वे तीव्र गति से वृन्दावन की ओर चल पड़े। अक्रूर जी श्रीकृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पित थे और … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – २५ – कंस का भय और षड्यंत्र

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << नप्पिन्नैप्पिराट्टि कंस ने कई राक्षसों को यह विचारकर भेजा कि वे श्रीकृष्ण को मारने और अपहरण करने में सक्षम हैं। परन्तु उन सभी राक्षसों का श्रीकृष्ण ने वध कर दिया, और कंस निराश और भयभीत हो गया। भगवान विष्णु के महान … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – २४ – नप्पिन्नैप्पिराट्टि (नीळा देवी)

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << अरिष्टासुर, केशी और व्योमासुर का वध कृष्ण लीलाओं में एक अति सुन्दर और महत्वपूर्ण तत्व है श्रीकृष्ण और नप्पिन्नैप्पिराट्टि (नीळा देवी) के बीच में सम्बन्ध। हम इसका पूर्णानन्द आऴ्वारों के पासुरों से ले सकते हैं। प्रथम हमें यह समझना होगा कि … Read more

ಕೃಷ್ಣ ಲೀಲೆಗಳ ಸಾರಾಂಶ – 1 – ಶ್ರೀಕೃಷ್ಣನ ಜನನ

ಶ್ರೀಃ ಶ್ರೀಮತೇ ಶಠಕೋಪಾಯ ನಮಃ ಶ್ರೀಮತೇ ರಾಮಾನುಜಾಯ ನಮಃ ಶ್ರೀಮದ್ವರವರಮುನಯೇ ನಮಃ ಶ್ರೀವಾನಾಚಲ ಮಹಾಮುನಯೇ ನಮಃ ಕೃಷ್ಣ ಲೀಲೆಗಳ ಸಾರಾಂಶ ಭಗವಂತನ ನಿರ್ಹೇತುಕ ಕೃಪೆಯಿಂದ ಭಕ್ತಿರೂಪಾಪನ್ನವಾದ ಜ್ಞಾನವನ್ನು ಪಡೆದ ಆಳ್ವಾರರು ಮತ್ತು ಭೂಮಿ ಪಿರಾಟ್ಟಿಯ/ದೇವಿಯ ಅವತಾರರಾದ ಆಂಡಾಳ್ ನಾಚ್ಚಿಯಾರ್, ಅವರು ಕೃಷ್ಣಾವತಾರವನ್ನು ವಿಶೇಷವಾಗಿ ಈ ರೀತಿ ತಮ್ಮ  ಪಾಶುರಗಳಲ್ಲಿ ಹಾಡಿ ಹೊಗಳಿದ್ದಾರೆ “ಆಟ್ಕುಲತ್ತು ತೋನ್ರಿಯ ಆಯರ್ ಕೋವಿನೈ”(ನಮ್ಮನ್ನು ಉದ್ಧಾರಿಸಲು ರಾಜ ಗೋಪಾಲನಾಗಿ ಅವತರಿಸಿದವನು),”ಪಿರಾನ್ದಾವಾರೂಮ್”(ಅದ್ಭುತವಾಗಿ ಅವತರಿಸಿದವನು),”ಮನ್ನಿನ್ ಬಾರಿ ನಿಕ್ಕುದಾರ್ಕೆ ವಡಮದುರೈಪ್ಪಿರನ್ದಾನ್”( ಭೂ ಭಾರವನ್ನು ನಾಶ ಮಾಡಲು ಉತ್ತರ ಭಾರತದ … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – २३ – अरिष्टासुर, केशी और व्योमासुर का वध

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << घड़ों के साथ नृत्य इस प्रकार कृष्ण वृन्दावन में वास कर रहे थे तब कुछ और असुरों को कृष्ण को मारने के लिए कंस द्वारा भेजा गया। कृष्ण ने सहज ही उन सब का वध कर दिया। आइए उन लीला क्षणों … Read more

कृष्ण की लीलाएँ और उनका सार – २२ – घड़ों के साथ नृत्य

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << रास क्रीडा  कृष्ण की यह लीला कुडक्कुत्तु भी बहुत अद्भुत है। कुडक्कूत्तु का अर्थ है घड़ा पकड़ना, कटि भाग पर ढोल बांधना, उस ढोल बजाना और नृत्य करना। यह वर्गाकार (चौराहा) में किया जाता है ताकि प्रत्येक उसको देख सके और … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – २१ – रास क्रीड़ा

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला <<गोवर्धन लीला कृष्ण की लीलाओं में से एक अद्भुत लीला गोपिकाओं के साथ रास क्रीड़ा करना है। रास क्रीड़ा का अर्थ है चांदनी रात में एक दूसरे का हाथ पकड़कर आनन्दपूर्वक नृत्य करना। एक रात्रि को कृष्ण ने वन में रहकर बाँसुरी … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – २० – गोवर्धन लीला

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << ऋषिपत्नियों द्वारा अनुग्रह प्राप्ति जब कृष्ण सप्त वर्ष हुए तब एक अतिमानवीय लीला की, जो बहुत ही अद्भुत थी। आइए उस आनन्दवर्धक लीला का अनुभव करें। एक दिन, वृन्दावन में वृद्ध ग्वालों ने एकत्र होकर एक उत्सव की चर्चा की। उसी … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – १९ – ऋषिपत्नियों द्वारा अनुग्रह प्राप्ति

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << वस्त्र हरण एक बार कृष्ण बलराम और उनके ग्वाल-बाल सखा वृन्दावन में किसी वन में बैठे हुए थे। ग्वाल-बालों को भूख लगी तो उन्होंने कृष्ण और बलराम की ओर देख उनसे भोजन की व्यवस्था करने के लिए प्रार्थना की।उसी समय, कृष्ण … Read more