यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ३४
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ३३ अब तिरुमला का वर्णन भाद्रपद महिने के पहिले दिन तिरुमला पर्वत पर ब्रह्मोत्सव प्रारम्भ होता हैं। उस दिन श्रीपेरिय केळ्वि जीयर् (पर्वत पर प्रधान आचार्य जो मन्दिर कि देख रेक करते हैं) को एक स्वप्न आया जब लोग उन्हें कहते हैं … Read more