कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – २७ – मथुरा में श्रीकृष्ण का आशीर्वाद और क्रोध

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला <<अक्रूर जी की यात्रा कृष्ण और बलराम अक्रूर जी के रथ में सवार होकर मथुरा पहुँचे। वे अक्रूर जी को भेजकर प्रसन्नता से मथुरा की गलियों में घूमने लगे। वहाँ की हवेलियों से, नगर की महिलाओं ने कृष्ण और बलराम को आनन्दपूर्वक … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १०

पूरी शृंखला पूर्व​ श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपाकर यह समझाते हैं कि कैसे अम्माजी मिलन और अलगाव में पुरुषकार कैसे करती हैं।  सूत्रं – १० सम्श्लेष दशयिल् ईश्वरनैत् तिरुत्तुम्; विश्लेष दशयिल् चेतननैत् तिरुत्तुम् सरल अनुवाद संघ में ईश्वर को सुधारेगी और अलगाव में … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार- २६ – अक्रूर जी की यात्रा

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << कंस‌ का भयभीत होना और षड्यंत्र कंस ने श्रीकृष्ण और बलराम को लाने के लिए अक्रूर जी को भेजा। प्रभात वेला में ही वे तीव्र गति से वृन्दावन की ओर चल पड़े। अक्रूर जी श्रीकृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पित थे और … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – २५ – कंस का भय और षड्यंत्र

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << नप्पिन्नैप्पिराट्टि कंस ने कई राक्षसों को यह विचारकर भेजा कि वे श्रीकृष्ण को मारने और अपहरण करने में सक्षम हैं। परन्तु उन सभी राक्षसों का श्रीकृष्ण ने वध कर दिया, और कंस निराश और भयभीत हो गया। भगवान विष्णु के महान … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – २४ – नप्पिन्नैप्पिराट्टि (नीळा देवी)

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << अरिष्टासुर, केशी और व्योमासुर का वध कृष्ण लीलाओं में एक अति सुन्दर और महत्वपूर्ण तत्व है श्रीकृष्ण और नप्पिन्नैप्पिराट्टि (नीळा देवी) के बीच में सम्बन्ध। हम इसका पूर्णानन्द आऴ्वारों के पासुरों से ले सकते हैं। प्रथम हमें यह समझना होगा कि … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – २३ – अरिष्टासुर, केशी और व्योमासुर का वध

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << घड़ों के साथ नृत्य इस प्रकार कृष्ण वृन्दावन में वास कर रहे थे तब कुछ और असुरों को कृष्ण को मारने के लिए कंस द्वारा भेजा गया। कृष्ण ने सहज ही उन सब का वध कर दिया। आइए उन लीला क्षणों … Read more

कृष्ण की लीलाएँ और उनका सार – २२ – घड़ों के साथ नृत्य

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << रास क्रीडा  कृष्ण की यह लीला कुडक्कुत्तु भी बहुत अद्भुत है। कुडक्कूत्तु का अर्थ है घड़ा पकड़ना, कटि भाग पर ढोल बांधना, उस ढोल बजाना और नृत्य करना। यह वर्गाकार (चौराहा) में किया जाता है ताकि प्रत्येक उसको देख सके और … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – २१ – रास क्रीड़ा

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला <<गोवर्धन लीला कृष्ण की लीलाओं में से एक अद्भुत लीला गोपिकाओं के साथ रास क्रीड़ा करना है। रास क्रीड़ा का अर्थ है चांदनी रात में एक दूसरे का हाथ पकड़कर आनन्दपूर्वक नृत्य करना। एक रात्रि को कृष्ण ने वन में रहकर बाँसुरी … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – २० – गोवर्धन लीला

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << ऋषिपत्नियों द्वारा अनुग्रह प्राप्ति जब कृष्ण सप्त वर्ष हुए तब एक अतिमानवीय लीला की, जो बहुत ही अद्भुत थी। आइए उस आनन्दवर्धक लीला का अनुभव करें। एक दिन, वृन्दावन में वृद्ध ग्वालों ने एकत्र होकर एक उत्सव की चर्चा की। उसी … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं ९

श्री:श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी शृंखला पूर्व​ अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य​ स्वामीजी दयापूर्वक इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि अम्माजी का पुरुषकारत्व कहाँ प्रकट होता है, जिसमें ऐसे गुण हैं।  सूत्रं – ९ सम्श्लेष विशेषङ्गळ् इरण्डिलुम् पुरुषकारत्वम् तोट्रुम् सरल अनुवाद मिलन और वियोग दोनों में, उनका पुरुषकारत्व प्रकट … Read more