कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – ४४ – शिशुपाल का वध

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद् वरवरमुनये नमः  श्रीवानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << जरासन्ध का वध युधिष्ठिर ने कृष्ण की उपस्थिति में राजसूय यज्ञ आरम्भ किया। यज्ञ में बहुत ऋषियों और विद्वानों को सम्मिलित किया। यज्ञ में प्रथम सम्मान किसको दिया जाए यह प्रश्न उठा। तत्क्षण सहदेव ने दृढ़ता से स्पष्टीकरण किया, “सर्वश्रेष्ठ … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – ४३ – जरासन्ध का वध

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << द्वारका में जीवन और नारदजी का आनंद एक बार नारदजी द्वारका जी गये। कृष्ण उनके सत्कार के लिए आगे आए और उनकी स्तुति, सेवा की। वे सर्वत्र भ्रमण करते हैं इसलिए कृष्ण ने उनसे पूछा, “पांडव कैसे हैं?” उन्होंने उत्तर … Read more

कृष्ण लीलाएं और उनका सार – ४२ – द्वारका में जीवन और नारद जी का आनन्द

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << पौण्ड्रक और सीमालिका का वध साम्ब कृष्ण और जाम्बवति के पुत्र थे। लक्ष्मणा, जो दुर्योधन की पुत्री थी के स्वयंवर के समय उसने हरण कर लिया। यह देख कौरव बहुत क्रोधित हुए और विशाल सेना सहित साम्ब पर आक्रमण किया। साम्ब अकेले … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – ४१ – पौण्ड्रक और सीमालिक का वध

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः। श्रीमते रामानुजाय नमः। श्रीमद् वरवरमुनये नमः। श्रीवानाचलमहामुनये नमः। श्रृंखला << बाणासुर का वध वासुदेव कृष्ण की महिमा को देखकर, पौण्ड्रक नामक करुष राजा ने स्वयं को सच्चा और सर्वश्रेष्ठ स्वामी मानने लगा। वह कृष्ण की भांति शंख और चक्र लेकर घूमने लगा। एक बार उसने श्रीद्वारिका में विराजमान कृष्ण को दूत … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – ४० – बाणासुर का वध

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः। श्रीमते रामानुजाय नमः। श्रीमद् वरवरमुनये नमः। श्रीवानाचलमहामुनये नमः। श्रृंखला << नरकासुर का वध कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न के पुत्र, नाम अनिरुद्ध, बहुत सुंदर था। महाबली के सौ पुत्रों में बाण सबसे बड़े थे। शोणितपुर पर उसका शासन था। बाण की पुत्री उषा अनिरुद्ध को चाहती थी और उससे विवाह कर लिया। … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – ३९ – नरकासुर का वध

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः। श्रीमते रामानुजाय नमः। श्रीमद् वरवरमुनये नमः। श्री वानाचलमहामुनये नमः। श्रृंखला << अन्य पाँच पत्नियाँ कृष्ण और सत्यभामा पिराट्टि ने नरकासुर का वध कैसे किया उसका आनन्द लें। कहा जाता है कि नरकासुर का जन्म वाराह भगवान और भूमि पिराट्टि से हुआ परन्तु कुसंगति के कारण वह राक्षस हो गया। वह मानव … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी शृंखला पूर्व​ अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपाकर अम्माजी की प्रतिक्रीया समझाते हैं जब वें उनकी परामर्च पर नहीं बदलते हैं।  सूत्रं – १३ उपदेशत्ताले मीळाद​ पोदु चेतननै अरुळाले तिरुत्तुम, ईश्वरनै अऴाले  तिरुत्तुम।  सरल अनुवाद जब वें अम्माजी के परामर्श को सुनकर नहीं … Read more

आचार्य हृदयम् – अवतारिका

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << तनियन् सर्वेश्वर, जिनकी श्री महालक्ष्मी जी दिव्य पत्नी हैं, वे सभी के स्वामी हैं। श्रीवैकुंठ (परमपद, आध्यात्मिक क्षेत्र) में नित्यसूरियों (शाश्वत मुक्त आत्माओं) द्वारा प्रदान की जाने वाली शाश्वत सेवाओं को स्वीकार कर रहे हैं जो असीमित आनंद से … Read more

आचार्य हृदयम् – तनियन् (मंगळाचरण)

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रृंखला आचार्य स्वान्त वक्तारम् अभिरमवराभितम् ।श्री कृष्ण तनयम् वन्दे जगद्गुरुवरानुजम् ॥ मैं अऴगिय मणवाळप् पेरुमाळ् नयनार् को, जो आचार्य हृदयम् नामक दिव्य ग्रंथ के रचयिता हैं, जो श्री कृष्ण (वडक्कु तिरुविधि पिळ्ळै) के पुत्र और पिळ्ळै लोकाचार्य के छोटे भाई हैं … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी शृंखला पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपाकर समझाते हैं कि आपकी सलाह दोनों ईश्वर और चेतन को लाभ पहूँचायेगी।  सूत्रं – १२ उपदेशत्ताले  इरुवरुडैयवुम्  कर्म पारतंत्रयम् कुलैयुम्।  सरल अनुवाद उनकी सलाह से, ईश्वर और चेतन दोनों की कर्म पर निर्भरता नष्ट हो … Read more