आचार्य हृदयम् – अवतारिका

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << तनियन् सर्वेश्वर, जिनकी श्री महालक्ष्मी जी दिव्य पत्नी हैं, वे सभी के स्वामी हैं। श्रीवैकुंठ (परमपद, आध्यात्मिक क्षेत्र) में नित्यसूरियों (शाश्वत मुक्त आत्माओं) द्वारा प्रदान की जाने वाली शाश्वत सेवाओं को स्वीकार कर रहे हैं जो असीमित आनंद से … Read more

आचार्य हृदयम् – तनियन् (मंगळाचरण)

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रृंखला आचार्य स्वान्त वक्तारम् अभिरमवराभितम् ।श्री कृष्ण तनयम् वन्दे जगद्गुरुवरानुजम् ॥ मैं अऴगिय मणवाळप् पेरुमाळ् नयनार् को, जो आचार्य हृदयम् नामक दिव्य ग्रंथ के रचयिता हैं, जो श्री कृष्ण (वडक्कु तिरुविधि पिळ्ळै) के पुत्र और पिळ्ळै लोकाचार्य के छोटे भाई हैं … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी शृंखला पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपाकर समझाते हैं कि आपकी सलाह दोनों ईश्वर और चेतन को लाभ पहूँचायेगी।  सूत्रं – १२ उपदेशत्ताले  इरुवरुडैयवुम्  कर्म पारतंत्रयम् कुलैयुम्।  सरल अनुवाद उनकी सलाह से, ईश्वर और चेतन दोनों की कर्म पर निर्भरता नष्ट हो … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं ११

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी शृंखला पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळैलोकाचार्य स्वामीजी कृपाकर इस प्रश्न का उत्तर दे रहे हैं कि वह ईश्वर और चेतना दोनों को कैसे सुधारती हैं?  सूत्रं – ११ इरुवरैयुम् तिरुत्तुवदु उपदेशत्ताले सरल अनुवाद वह अपनी सलाह से दोनों को सुधारती हैं।  व्याख्यान इरुवरैयुम् … … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – ३८ – अन्य पाँच पत्नियाँ

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << खांडव वन का अग्निदहन, इंद्रप्रस्थ का निर्माण कृष्ण ने अन्य पाँच स्त्रियों से कैसे विवाह किया आइए जानते हैं। सभी आठ स्त्रियाँ श्रीकृष्णावतार में उनकी आठ पटरानियाँ हैं। एकदा कृष्ण और अर्जुन आखेट के लिए वन को गए और यमुना जी … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – ३७ – खांडव वन का अग्निदहन, इंद्रप्रस्थ का निर्माण

। ।श्री: श्रीमते शठकोपाय नम: श्रीमते रामानुजाय नम: श्रीमत् वरवरमुनये नमः। । श्रृंखला << प्रद्युम्न का जन्म और इतिहास पाँच पांडव अज्ञातवास के पश्चात् लौट आए हैं यह सूचना प्राप्त करते ही कृष्ण सात्यकि और अन्य यादवों के साथ, उनसे मिलने इन्द्रप्रस्थ गये और पांडवों से मिलकर अति प्रसन्न हुए। उन्होंने उनसे बहुत प्रेम से … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – ३६ – प्रद्युम्न का जन्म और इतिहास

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << स्यमन्तक मणिलीला, जाम्बवती व सत्यभामा कल्याणम् प्रद्युम्न का जन्म श्रीकृष्ण और रुक्मिणीप्पिराट्टि के पुत्र के रूप में हुआ था। अपने पूर्व जन्म में वे मन्मथ (कामदेव) थे। उन्हें भगवान के आंशिक अवतार के रूप में महिमा दी गई। शिव की क्रोधित … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – ३५ – स्यमन्तक मणिलीला, जाम्बवती व सत्यभामा कल्याणम्

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << रुक्मिणी कल्याणम् सूर्य भक्त एक सत्राजित नामक राजा था। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर सूर्यदेव ने स्यमन्तक मणि दी। वह कांतिमय रत्न अपार धन प्रदान करने वाला है। सत्राजित ने उसे सांकल में पिरोकर पहन लिया और आनन्द से रहने लगा। … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – ३४ – रुक्मिणी कल्याणम्

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << द्वारका निर्माण, मुचुकुन्द को आशीर्वाद देना श्रीकृष्ण द्वारा कालयवन का सेना सहित विनाश हो गया तत्पश्चात् जरासन्ध एक विशाल सेना सहित युद्ध करने पहुंचा। श्रीकृष्ण ने उस समय उसका वध करना उचित न समझते हुए वहां से बलराम के साथ द्वारका … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – ३३ – द्वारका निर्माण, मुचुकुन्द को आशीर्वाद देना

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << सान्दीपनि मुनि के गुरुकुल में वास करना गुरुकुल वास की अवधि पूर्ण करने के पश्चात्, श्रीकृष्ण मथुरा में रहे। कंस वध के पश्चात् उसकी दो पत्नियाँ जो कि जरासन्ध की पुत्रियाँ थीं उन्होंने अपने पिता के पास जाकर अपना भारी दु:ख … Read more