श्रीवचनभूषण – सूत्रं १८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी शृंखला पूर्व अवतारिका अब, इस प्रश्न के लिए “क्या ऐसा कोई उदाहरण है जहां पिराट्टी और पेरुमाल ने चेतन को उनके दोष और गुणहानी के साथ प्रसाद के रूप में स्वीकार किया?”, श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी का मानना ​​है कि “राक्षसियों और अर्जुन … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १७

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी शृंखला पूर्व​ अवतारिका यह समझाने के पश्चात कि यदि पिराट्टि  और पेरुमाळ् निर्णय लेते हैं कि “जब तक दोष और गुण समाप्त नहीं हो जाते, हम चेतनों को स्वीकार नहीं करेंगे”, वे दोष और गुण प्राप्त कर लेंगे, अब श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १६

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी शृंखला पूर्व​ अवतारिका पुरुषकार (पिराट्टि) और उपाय (भगवान) दोनों चेतन को उसके दोष और गुणहानी (अच्छे गुणों की कमी) दूर होने से पहले ही क्यों स्वीकार कर रहे हैं? क्या होगा यदि वे चेतना के उन पहलुओं से मुक्त होने की प्रतीक्षा … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १५

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी शृंखला पूर्व अवतारिका इस प्रकार,  श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी ने दयापूर्वक पुरुषकार (पिराट्टि) और उपाय (भगवान्) दोनों की विशिष्ट/व्यक्तिगत महानता को समझाया। इसके अलावा, वह दयापूर्वक उनकी सामान्य महानता की व्याख्या करते हैं। सूत्रं १५ पुरुषकारत्तुक्कुम् उपायत्तुक्कुम् वैभवमावदु दोषत्तैयुम् गुणहानियैयुम् पार्त्तु उपेक्षियाद अळवन्ऱिक्के … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – ५२ – गीतोपदेश

श्री:श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << अर्जुन और दुर्योधन की सहायता कृष्ण की दिव्य आकांक्षा अनुसार महाभारत युद्ध आरम्भ हुआ, कृष्ण अर्जुन के सारथी बने। उन्होंने अपनी विशाल सेना दुर्योधन को दे दी। पांडवों और कौरवों के लिए विशाल सेनाएं एकत्रित हुई। वहां एकत्र हुए सैनिकों को … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी शृंखला पूर्व अवतारिका कृपा के विषय पर कहने के पश्चात श्रीरामायण की महानता कैसे प्रगट होती हैं यह समझाने के पश्चात श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक बताते हैं कि महाभारत में उपाय की महानता कैसे प्रगट होती हैं।  सूत्रं – १४ अऱियाद​ अर्थङ्गळै … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – ५१ – अर्जुन और दुर्योधन की सहायता

श्री:श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << पांडव दूत -भाग २ कृष्ण की महिमा और योग्यता विश्व विख्यात है, इसीलिए युद्ध आरम्भ होने से पहले अर्जुन और दुर्योधन दोनों ही कृष्ण से सहायता लेने के लिए गये। आइए जानते हैं कि उन्होंने सहायता कैसे की। एक बार कृष्ण … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – ५० – पांडव दूत – भाग २

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << विदुर पर कृपा कौरवों की सभा में जो हुआ आइए उसका आनन्द लें।जब कृष्ण दूत बनकर वहां पधारे, तब धृतराष्ट्र ने सोचा कि वह कृष्ण को बहुत-सा धन देकर उन्हें अपने पक्ष में कर लेंगे परन्तु तुरन्त ही उनको अनुभूति … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – ४९ – विदुर पर कृपा

श्री:श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << पांडव दूत – भाग १ पाण्डु और विदुर धृतराष्ट्र के अनुज थे। विदुर कृष्ण के बहुत श्रद्धा रखते थे। हमारे सम्प्रदाय में वे इतने महान हैं कि उनको विदुराऴ्वान् के नाम से जाना जाता है। जब कृष्ण पाण्डवदूत के रूप में … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – ४८ – पांडव दूत – भाग १

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << द्रौपदी का कल्याण कृष्ण द्वारा प्रकट किए सबसे अद्भुत गुणों में से एक है आश्रित पारतन्त्र्य- भक्तों के वचनों का पूर्णतः पालन करना। इन गुणों को हम दो प्रकार से जान सकते हैं – प्रथम, पांडवों के लिए दूत बनकर … Read more