लोकाचार्य स्वामीजी की दिव्य-श्रीसूक्तियां – ९

श्रीः  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः  श्री वानाचलमहामुनये नमः लोकाचार्य स्वामीजी की दिव्य-श्रीसूक्तियां << पूर्व अनुच्छेद ८१) अनुष्ठानम् साधनमागातु अनुष्ठान साधन नही होता अर्थात् सही साधन नही है । अनुवादक टिप्पणी : भगवद्प्राप्ति के लिये भगवान् ही एक मात्र उपाय साधन है । केवल उनके सङ्कल्प मात्र से ही सब कुछ होता है … Read more

विरोधी परिहारंगल (बाधाओं का निष्कासन) – ३२

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रीवादिभीकरमहागुरुवे नमः “श्रीवैष्णवों को अपने दैनिक जीवन में कैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है इसका उपदेश श्रीरामानुज स्वामीजी ने वंगी पुरत्तु नम्बी को दिया। वंगी पुरत्तु नम्बी ने उसपर व्याख्या करके “विरोधी परिहारंगल (बाधाओं को हटाना)” नामक ग्रन्थ के रूप में प्रस्तुत किया। … Read more

वरदराज भगवान् आविर्भाव कि कहानी १५ – २

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः वरदराज भगवान् आविर्भाव कि कहानी << भाग १५ – १ ब्रह्मा ने भगवान् से प्रार्थना की कि ईश्वरीय रूप से थिरु अथ्थिगिरी (तिरु अत्तिगिरि) में स्थायी रूप से रहें जो प्रकाश के रूप में खड़ा हो, जो भक्तों द्वारा पूजित हो। और भगवान के मुंह से … Read more

वरदराज भगवान् आविर्भाव कि कहानी १५ – १

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः वरदराज भगवान् आविर्भाव कि कहानी << भाग १४ – ३ अथ्थिगिरी के बेदाग़ भगवान, अयन को देखकर बोले…. “मेरे पुत्र, ब्रह्मा! आपने कुछ परीक्षणों और विपत्तियों (आपके इस प्रयत्न में) का सामना किया है, परंतू इस बात से अनजान हो कि आपने सफलतापूर्वक याग संपन्न किया और … Read more

वरदराज भगवान् आविर्भाव कि कहानी १४ – ३

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः वरदराज भगवान् आविर्भाव कि कहानी << भाग १४ -२ उदारचरित और शानदार पेररुराळन् (वरदराज भगवान्) ब्रह्मा की श्रद्धा और भक्ति को स्वीकार करते हुए एक मुस्कुराहट दिया था। ब्रह्मा ने भी भगवान की उदारता और करुणा पर विचारमग्न होके नमस्कार किया। “हे भगवान! आमुधल्वा (सर्वप्रथम और सर्वाधिक)! यह … Read more

अन्तिमोपाय निष्ठा – १२ – आचार्य भगवान् के अवतार हैं

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः अन्तिमोपाय निष्ठा << एम्बार और अन्य शिष्य पिछले लेख (अन्तिमोपाय निष्ठा – ११ – एम्बार और अन्य शिष्य) में हमने एम्बार के दिव्य दृष्टिकोण और कुछ अन्य घटनाओं को देखा। इस लेख में, यह स्थापित किया गया है कि आचार्य भगवान् के अवतार हैं और … Read more

विरोधी परिहारंगल (बाधाओं का निष्कासन) – ३१

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रीवादिभीकरमहागुरुवे नमः “श्रीवैष्णवों को अपने दैनिक जीवन में कैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है इसका उपदेश श्रीरामानुज स्वामीजी ने वंगी पुरत्तु नम्बी को दिया। वंगी पुरत्तु नम्बी ने उसपर व्याख्या करके “विरोधी परिहारंगल (बाधाओं को हटाना)” नामक ग्रन्थ के रूप में प्रस्तुत किया। … Read more

वरदराज भगवान् आविर्भाव कि कहानी १४ – २

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः वरदराज भगवान् आविर्भाव कि कहानी << भाग १४ – १ सोने के पर्वत के रूप में बढ़ती हुई, “पुण्य कोटी विमान” (भगवान का वाहन) दिखाई दे रहा था। अंदर वरदराज भगवान् एक  प्रकाश के रूप में दिखाई दिये जो सूरज को भी लज्जित करदे। “चैत्र मासी सिथे पक्षे चतुर्धस्याम … Read more

वरदराज भगवान् आविर्भाव कि कहानी १४ – १

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः वरदराज भगवान् आविर्भाव कि कहानी << भाग १३ ब्रह्मा ने ध्यान से सुना जो वेगसेतु पेरुमाल ने सरस्वती को निर्देश दिया था। मैं आने वाले सभी दिनों में आपके तट पर बस जाऊँगा। उनके लिए संबोधित शब्द (ब्रह्मा) कि वह जल्द ही उपहार मिलेगा, उनके मन … Read more

वरदराज भगवान् आविर्भाव कि कहानी १३

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः वरदराज भगवान् आविर्भाव कि कहानी << भाग १२ – २ वेगवती काँची की ओर तेजी से बड रही थी। भगवान दो स्थानों में बाँध के रूप में थे । भगवान के प्रकट किए गए रूप का दर्शन करने के बाद, वह पुनः दर्शन (झलक) कि अत्यन्त अभिलाशित … Read more