लोकाचार्य स्वामीजी की दिव्य-श्रीसूक्तियां – ९
श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचलमहामुनये नमः लोकाचार्य स्वामीजी की दिव्य-श्रीसूक्तियां << पूर्व अनुच्छेद ८१) अनुष्ठानम् साधनमागातु अनुष्ठान साधन नही होता अर्थात् सही साधन नही है । अनुवादक टिप्पणी : भगवद्प्राप्ति के लिये भगवान् ही एक मात्र उपाय साधन है । केवल उनके सङ्कल्प मात्र से ही सब कुछ होता है … Read more