विरोधी परिहारंगल (बाधाओं का निष्कासन) -१३

 श्रीः  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः  श्रीवानाचलमहामुनये नमः  श्रीवादिभीकरमहागुरुवे नमः श्रीवैष्णवों को अपने दैनिक जीवन में कैसी चुनोतियों का सामना करना पड़ता है इसका उपदेश श्रीरामानुज स्वामीजी ने वंगी पुरुत्तु नम्बी को दिया । वंगी पुरुत्तु नम्बी ने उस पर व्याख्या करके “विरोधि परिहारंगल” नामक ग्रन्थ के रूप में प्रस्तुत किया । … Read more

श्री वैष्णव लक्षण – ४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्री वैष्णव लक्षण << पूर्व अनुच्छेद गुरू परम्परा अपने पिछले लेख में हमने आचार्य और शिष्य के रिश्ते के बारे में चर्चा की थी। कोई अगर हमें पुछे कि, “हमें अपने और भगवान के बीच में आचार्य की क्या जरूरत है? … Read more

श्री वैष्णव लक्षण – ३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्री वैष्णव लक्षण << पूर्व अनुच्छेद आचार्य–शिष्य संबंध उदैयवर (श्रीरामानुज स्वामीजी)– आलवान (श्री कुरेश स्वामीजी)- आदर्श आचार्य और् शिष्य – कूरम पिछले लेख में हमने देखा कि पञ्च संस्कार हमारे श्रीवैष्णव जीवन को प्रारम्भ करता है। हमने आचार्य और शिष्य के … Read more

श्रीवैष्णव संप्रदाय मार्गदर्शिका – संदर्भ सूची

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रीवैष्णव संप्रदाय मार्गदर्शिका << पूर्व अनुच्छेद हमारे पास विभिन्न भाषाओं में बहुत से लेख/ अनुच्छेद है। कुछ उपयोगी विषय वस्तु की सूचि यहाँ उपलब्ध है: सामान्य श्रृंखलायें https://koyil.org/index.php/portal – श्रीवैष्णव वेबसाइट पोर्टल https://acharyas.koyil.org – गुरु परंपरा पोर्टल – विभिन्न भाषाओँ में आलवारों/ आचार्यों की जीवनी (अंग्रेजी, हिंदी, … Read more

श्रीवैष्णव संप्रदाय मार्गदर्शिका – दैनिक जीवन के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदु

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रीवैष्णव संप्रदाय मार्गदर्शिका << पूर्व अनुच्छेद श्रीवैष्णवों के लिए, निम्नलिखित बिंदु समझना और अपने दैनिक अनुष्ठान/ अभ्यास में उसका अनुसरण करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। सभी श्रीवैष्णवों का सम्मान करना चाहिए, उनके वर्ण, आश्रम, ज्ञान आदि के आधार पर मूल्यांकन नहीं करना … Read more

श्रीवैष्णव संप्रदाय मार्गदर्शिका – अपचारों से बचना

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रीवैष्णव संप्रदाय मार्गदर्शिका << पूर्व अनुच्छेद चांडिलि – गरुड़जी का द्रष्टांत (जब श्रीगरुड़ आलवार विचार करते है कि चांडिलि दिव्य देश के बजाय इस क्षुद्र स्थान पर निवास कर रही है, तब तुरंत उनके पंख नष्ट हो जाते है) इस लेख … Read more

विरोधी परिहारंगल (बाधाओं का निष्कासन) – १२

श्रीः  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः  श्रीवानाचलमहामुनये नमः  श्रीवादिभीकरमहागुरुवे नमः श्रीवैष्णवों को अपने दैनिक जीवन में कैसी चुनोतियों का सामना करना पड़ता है इसका उपदेश श्रीरामानुज स्वामीजी ने वंगी पुरुत्तु नम्बी को दिया । वंगी पुरुत्तु नम्बी ने उस पर व्याख्या करके “विरोधि परिहारंगल” नामक ग्रन्थ के रूप में प्रस्तुत किया । … Read more

श्रीवैष्णव संप्रदाय मार्गदर्शिका – अर्थ पंचक

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रीवैष्णव संप्रदाय मार्गदर्शिका << पूर्व अनुच्छेद ६ स्वरूपों में भगवान (जिन्हें प्राप्त करना ही परम धर्म है) – परत्वं (परमपद में), व्यूह (क्षीर सागर में), विभव (लीला विभूति में लिए गए अवतार), अन्तर्यामी (जीव के अंतर में बसने वाले परमात्मा), अर्चावतार … Read more

विरोधी परिहारंगल (बाधाओं का निष्कासन) -११

श्रीः  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः  श्रीवानाचलमहामुनये नमः  श्रीवादिभीकरमहागुरुवे नमः श्रीवैष्णवों को अपने दैनिक जीवन में कैसी चुनोतियों का सामना करना पड़ता है इसका उपदेश श्रीरामानुज स्वामीजी ने वंगी पुरुत्तु नम्बी को दिया । वंगी पुरुत्तु नम्बी ने उस पर व्याख्या करके “विरोधि परिहारंगल” नामक ग्रन्थ के रूप में प्रस्तुत किया । … Read more

श्रीवैष्णव संप्रदाय मार्गदर्शिका – तत्व त्रय – संक्षिप्त वर्णन

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमदवरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्रीवैष्णव संप्रदाय मार्गदर्शिका << पूर्व अनुच्छेद तत्वों को 3 मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है – चित, अचित और ईश्वर। चित में, वे सभी असंख्य जीवात्मायें समाहित है, जो नित्य विभूति (परमपद- नित्य आध्यात्मिक धाम) और लीला विभूति (संसार – अनित्य … Read more