द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् 18
श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः द्रमिडोपनिषद प्रभाव् सर्वस्वम् << भाग 17 मूल लेखन – पेरुमाल कोइल श्री उभय वेदांत प्रतिवादि अन्नन्गराचार्य स्वामी मनोहरता (प्रसन्नता) के भिन्न भिन्न अनुभव श्रीमद् भगवद्गीता के १०वें अध्याय का ९वां श्लोक कहता हैं कि “मच्चिता मद्गतप्राणा बोधयन्त: परस्परम् | कथयन्तश्च मां नित्यं तुष्यन्ति च रमन्ति … Read more