श्रीवचन भूषण – सूत्रं ४५
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी इन तीनों विषयों के कारण को समझाते हैं अर्थात अज्ञान, आदि। सूत्रं – ४५ इम्मून्ऱुम् मून्ऱु तत्वत्तैयुम् पट्रि वरुम्। सरल अनुवाद ये तीन विषय तीन अस्तित्त्व (अचित, चित्त और ईश्वर) के आधार पर बनते हैं। व्याख्या … Read more