यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ८३
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ८२ कोयिल् में आगे की घटनाएँ जिस दिन श्रीवेङ्कटेश भगवान ने तिरुमलै अय्यङ्गार् को तिरुमला में कैङ्कर्य करने को कहा उस दिन श्रीवरवरमुनि स्वामीजी श्रीसहस्रगीति के ३.३ दशक ओऴिविल्कालमेल्लम् उडनाय् मन्नि वऴुविला अडिमै सेय्य वेण्डुम् नाम् (बिना रूके हमे निरंतर दोषरहित कैङ्कर्य … Read more