यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ८१
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ८० इळैयाऴ्वार पिळ्ळै से श्रीशैलेश दयापात्रम् सुनने के पश्चात रामानुज अय्यङ्गार् और अन्य अचंभे में थे। जज्ज्ञेऽमुनास्वप्न निवेदितम्हियत् कथं बदर्याश्रम नित्य वासिना।प्राकाशि मन्त्रार्थमिदं मुरद्विषेद्ययोध्या रामानुज आविसिष्मये॥ (श्रीअयोध्या रामानुज अय्यङ्गार् यह आश्चर्य कर रहे थे कि कैसे यह तनियन् जो भगवान मुरारी (श्रीकृष्ण … Read more