यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ७१
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ७० श्रीपरकाल स्वामीजी का मङ्गळाशासन् करने के पश्चात श्रीवरवरमुनि स्वामीजी ने वयलाळि मणवाळन् (तिरुवालित तिरुनगरी में भगवान) जो श्रीपरकाल स्वामीजी को प्रिय थे कि पूजा किये। वें फिर दयाकर तिरुमणङ्गोल्लै (वह स्थान जहां भगवान ने श्रीपरकाल स्वामीजी को तिरुमन्त्र का उपदेश दिया … Read more