यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ८८
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ८७ मधुरकवि स्वामीजी के निष्ठा के जैसे श्रीगोविन्द दास अप्पन् फिर एक दिन जब सभी जन श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के मठ में एक साथ इकट्ठे हुए थे, हालांकी सभी यह जानते थे कि श्रीवरवरमुनि स्वामीजी ने कहा कि “तेवुमट्रऱियेन्” (दास ओर कोई देवता … Read more