विरोधी परिहारंगल (बाधाओं का निष्कासन) – १६

 श्रीः  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः  श्रीवानाचलमहामुनये नमः  श्रीवादिभीकरमहागुरुवे नमः श्रीवैष्णवों को अपने दैनिक जीवन में कैसी चुनोतियों का सामना करना पड़ता है इसका उपदेश श्रीरामानुज स्वामीजी ने वंगी पुरुत्तु नम्बी को दिया । वंगी पुरुत्तु नम्बी ने उस पर व्याख्या करके “विरोधि परिहारंगल” नामक ग्रन्थ के रूप में प्रस्तुत किया । … Read more

लोकाचार्य स्वामीजी की दिव्य-श्रीसूक्तियां – ३

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचलमहामुनये नमः लोकाचार्य स्वामीजी की दिव्य-श्रीसूक्तियां << पूर्व अनुच्छेद नम्पिळ्ळै – श्रीरङ्गम् २१) प्राप्ति पलमाय् वरुमतिरे कैङ्कर्यम् परमपद मे अप्रतिबन्धित सेवा (कैङ्कर्य), जीवात्मा का एकमात्र उद्देश्य – जीव का अन्तिम लक्ष्य जीवात्मा (जीव), स्वभाव से, परम ईश्वर भगवान् श्रीमन्नारायण का दास है | जब … Read more

विरोधी परिहारंगल (बाधाओं का निष्कासन) -१५

 श्रीः  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः  श्रीवानाचलमहामुनये नमः  श्रीवादिभीकरमहागुरुवे नमः श्रीवैष्णवों को अपने दैनिक जीवन में कैसी चुनोतियों का सामना करना पड़ता है इसका उपदेश श्रीरामानुज स्वामीजी ने वंगी पुरुत्तु नम्बी को दिया । वंगी पुरुत्तु नम्बी ने उस पर व्याख्या करके “विरोधि परिहारंगल” नामक ग्रन्थ के रूप में प्रस्तुत किया । … Read more

तत्व त्रय – ईश्वर

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः तत्व त्रय इस लेख को चित्रों के माध्यम से इस लिंक पर देखा जा सकता है- https://docs.google.com/presentation/d/1Q6qEuvsuGTv4z_5–HYzlLfRFkdprThj3xmqWoyqKCQ/present#slide=id.p पिछले अंकों में, हमने चित तत्व (जीवात्मा) –  https://granthams.koyil.org/2016/07/07/thathva-thrayam-chith-who-am-i/  और अचित तत्व – https://granthams.koyil.org/2016/07/17/thathva-thrayam-achith-what-is-matter-hindi/ के स्वरुप को देखा। श्रीपिल्लै लोकाचार्य के दिव्य ग्रंथ और उस … Read more

लोकाचार्य स्वामीजी की दिव्य-श्रीसूक्तियां – २

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्री वानाचलमहामुनये नमः लोकाचार्य स्वामीजी की दिव्य-श्रीसूक्तियां << पूर्व अनुच्छेद नम्पिळ्ळै(श्री कलिवैरिदास स्वामीजी) – तिरुवल्लिकेणि ११) प्राप्याभासङ्गगळिलु प्रापगाभासङ्गळिलुम् नेगिऴ्न्तु अवनैयोऴिन्त एल्लावत्तलुम् ओरु प्रयोअनमिन्रिक्के इरुक्क वेणुम्  वरमंगै नायिका , श्रीदेवी , भूमि देवी, आण्डाळ समेत श्री वानमामलै दैवनायक पेरुमाल , नाँगूनेरी -श्री शठकोप स्वामीजी इनके प्रति पूर्ण … Read more

विरोधी परिहारंगल (बाधाओं का निष्कासन) – १४

 श्रीः  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः  श्रीवानाचलमहामुनये नमः  श्रीवादिभीकरमहागुरुवे नमः श्रीवैष्णवों को अपने दैनिक जीवन में कैसी चुनोतियों का सामना करना पड़ता है इसका उपदेश श्रीरामानुज स्वामीजी ने वंगी पुरुत्तु नम्बी को दिया । वंगी पुरुत्तु नम्बी ने उस पर व्याख्या करके “विरोधि परिहारंगल” नामक ग्रन्थ के रूप में प्रस्तुत किया । … Read more

तत्व त्रय- अचित- माया क्या है?

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः तत्व त्रय इस लेख को चित्रों के माध्यम से इस लिंक पर देखा जा सकता है- https://docs.google.com/presentation/d/188gzTl_qZKtyIxiwKguIjBSkxH-9t9zUw_U98YJGbkk/present#slide=id.p पिछले अंक में ( https://granthams.koyil.org/2016/07/07/thathva-thrayam-chith-who-am-i/), हमने चित तत्व (जीवात्मा) का स्वरुप देखा। श्रीपिल्लै लोकाचार्य के दिव्य ग्रंथ और उस पर श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के सुंदर व्याख्यान … Read more

तत्व त्रय- चित- मैं कौन हूँ?

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः तत्व त्रय इस लेख को चित्रों के माध्यम से इस लिंक पर देखा जा सकता है- https://docs.google.com/presentation/d/10BxoIyZJnpfN4HWRjNaiqkWqa7WvWYc55rmp0kxVfM4/present#slide=id।p बुद्धिमान व्यक्ति की शिक्षा से चित (आत्मा) तत्व को समझना भूमिका आत्मा, जड़ पदार्थ/ माया और ईश्वर के सच्चे स्वरुप को जानने की जिज्ञासा प्रत्येक … Read more

श्री वैष्णव लक्षण – १३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्री वैष्णव लक्षण << पूर्व अनुच्छेद निष्कर्ष श्रीवरवरमुनि स्वामीजी पिछले लेख में हमने देखा कि श्री वरवरमुनि स्वामीजी एक आदर्श आचार्य थे जिनमे वे सभी गुण भरपूर थे जो एक श्रेष्ठ श्रीवैष्णव में होना चाहिए । अब हम उनके गौरवशालि के बारे … Read more

श्री वैष्णव लक्षण – १२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः श्री वैष्णव लक्षण << पूर्व अनुच्छेद ऒरोरुवर (सबसे आदर्श आचार्य) अपने पिछले लेख में हमने एक श्रीवैष्णव की दिनचर्या को देखा। एऱुम्बि अप्पा (श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के अष्टदिग्गजों में से एक हैं) अपने शिष्यों को समझाते हैं कि कैसे एक श्रीवैष्णव को अपना … Read more