श्रीवचन भूषण – सूत्रं २११

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम:

पूरी श्रृंखला

<< पूर्व

अवतारिका

श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक उस दृष्टिकोण से उत्तर प्रदान कर रहे हैं जिसमें प्रश्नकर्ता के विचार को विपरीत रूप से समझाया जाता है – अर्थात् जिसे प्रश्नकर्ता उत्तम मानता है उसे निम्न समझना और जिसे वह निम्न मानता है उसे उत्तम समझना।

सूत्रं – २११

ऒव्वादु

सरल अनुवाद

वें समान नहीं हैं। 

व्याख्या

कोई विशेष टिप्पणी नहीं।

अडियेन् केशव रामानुज दास

आधार – https://granthams.koyil.org/2021/09/04/srivachana-bhushanam-suthram-211-english/

संगृहीत- https://granthams.koyil.org/

प्रमेय (लक्ष्य) – https://koyil.org
प्रमाण (शास्त्र) – https://granthams.koyil.org
प्रमाता (आचार्य) – https://acharyas.koyil.org
श्रीवैष्णव शिक्षा/बालकों का पोर्टल – https://pillai.koyil.org

Leave a Comment