आचार्य हृदयम् – २१
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – २० अवतारिका (परिचय) आत्मा के सर्वस्वरूप के ज्ञान में दो भिन्न-भिन्न स्तरों का ज्ञान होता है – स्वरूप ज्ञानम् (सत्य स्वरूप का ज्ञान) और स्वरूप यथात्म्य ज्ञानम् (आन्तरिक सत्य स्वरूप का ज्ञान)। उसमें आत्मा के शेषत्वम् (दासत्व) और ज्ञातृत्वम् (ज्ञाता होने से) … Read more