श्रीवचन भूषण – सूत्रं ११०
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब उनसे पूछा गया कि, “ यह कहाँ देखी है कि भगवान में अच्छे गुणों में अपूर्णता मानते हुए भी भगवद् विषय में उनकी रुचि रही?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक समझाते हैं। सूत्रं – ११० “कॊडिय ऎन्नॆञ्जम् अवन् … Read more