आचार्य हृदयम् – १०
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नमः श्रृंखला << आचार्य हृदयम् – ९ अवतारिका (परिचय) अज्ञान (आत्मा का) और करुणामय हृदय (भगवान का) के कारण समझाये हैं। चूर्णिका – १० एतन्निमित्तम् मुन्नमे मुदल् मुन्नमेयान अचित् अयन अनादि सम्बन्दङ्गळ्। सामान्य व्याख्या आत्मा का अचित (प्रकृति/तत्व) और अयन (भगवान/धाम) के साथ अनादि काल से … Read more