यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग १६
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग १४ अब आऴवार् कि घटनाएं जब श्रीरङ्गनाथ भगवान कोऴिक्कोडु से प्रस्थान किये तब लोगों के पद (अर्चक या स्थानांत्तर) और लोगों के निवास (स्थलत्तार) के अनुचित्त बोली के कारण आऴवार् उनके संग न जा सके। उस समय पूर्व और पश्चिम (कोऴिक्कोडु में … Read more