कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – १९ – ऋषिपत्नियों द्वारा अनुग्रह प्राप्ति

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << वस्त्र हरण एक बार कृष्ण बलराम और उनके ग्वाल-बाल सखा वृन्दावन में किसी वन में बैठे हुए थे। ग्वाल-बालों को भूख लगी तो उन्होंने कृष्ण और बलराम की ओर देख उनसे भोजन की व्यवस्था करने के लिए प्रार्थना की।उसी समय, कृष्ण … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – १८ – वस्त्र-हरण

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला <<बाँसुरी बजाना कृष्ण की मुख्य लीलाओं में गोपियों के वस्त्र हरण की लीला भी प्रमुख लीला है। आईए इस लीला को सार सहित जाने। कृष्ण को ग्वालिनों से बहुत प्रेम था, उसी प्रकार गोपिकाओं को भी कृष्ण से अतिप्रेम था। कृष्ण अधिकतर … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – १७ – बाँसुरी बजाना

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << गायों और बछड़ों को चराना कृष्ण की मुख्य लीलाओं में से एक लीला बाँसुरी बजाना भी है। उनके कर कमलों में या कटिभाग में सदैव बांसुरी विद्यमान रहती है। जब भी कोई कृष्ण के बारे में सोचते हैं तो उन्हें बाँसुरी … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – १६ – गायों और बछड़ों को चराना

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << प्रलम्बासुर वध  अपनी किशोरावस्था में, कृष्ण के मनलुभावन सेवाओं में से एक गौओं को चराना अतिप्रिय था। नम्माऴ्वार् (श्रीशठकोप) ने तिरुवाय्मोऴि में वर्णन किया है “तिवत्तिलुम् पसु निरै मेय्प्पुवत्ति” (कृष्ण को परमपदम् में रहने से भी अधिक प्रिय गौओं को चराना … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – १५ – प्रलम्बासुर वध

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << कलिङ्ग नर्दनम् (कालियदमन) एक दिन कृष्ण और बलराम अपने ग्वाल-बाल सखाओं के साथ वृन्दावन में खेल रहे थे। एक प्रलम्बासुर नामक राक्षस ग्वाल-बाल का रूप धारण कर उनकी गोष्ठी में प्रवेश कर गया। वह किसी भी युक्ति को अपनाकर कृष्ण को … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – १४ – कलिङ्ग नर्दनम् (कालियदमन)

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << धेनुकासुर का वध (उद्धार) यमुना नदी के तट पर एक कालिय/कलिङ्ग नामक एक सर्प अपने परिवार के साथ रहता था। वह दुष्ट निरन्तर विष उगलकर तालाब को विषाक्त बना दिया ताकि कोई भी वहाँ न आ सके। यदि कोई वहाँ जाता … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार- १३ – धेनुकासुर का वध (उद्धार)

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << ब्रह्मा के अभिमान को दूर करना कृष्ण, बलराम अन्य गोपाल सखाओं के साथ वन में प्रसन्नचित्त होकर खेल रहे थे। तभी सभी ग्वाल-बालों ने बताया कि तालवन (ताड़ के वृक्षों का समूह) नामक स्थान है जहाँ परिपक्व मीठे फल हैं। परन्तु वहाँ … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – १२ – ब्रह्मा के अभिमान को दूर करना

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << अघासुर वध (उद्धार) सभी देवताओं ने कृष्ण के द्वारा अघासुर का वध हो जाने के पश्चात् (कृष्ण की) स्तुति की। यह सुनकर ब्रह्मा शीघ्र वहाँ आए, सब देखकर आश्चर्यचकित हो गये। ब्रह्मा जो भगवान के प्रति समर्पित थे अब तमोगुण प्रधान … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – ११ – अघासुर वध (उद्धार)

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << दधिपाण्डन द्वारा आशीर्वाद की प्राप्ति (मोक्ष प्राप्ति) जब कृष्ण लगभग पाँच वर्ष के हुए, तब ग्वाल-बालों के साथ गैय्या-बछड़ों को लेकर ध्यानपूर्वक वन को जाते थे और वृन्दावन में हरियाली से आच्छादित वन हैं, वे वन में हँसते खेलते, इधर-उधर दौड़ते, … Read more

कृष्ण लीलाएँ और उनका सार – १० – दधिपाण्डन द्वारा आशीर्वाद की प्राप्ति (मोक्ष प्राप्ति)

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद् वरवरमुनये नमः श्रीवानाचलमहामुनये नमः श्रृंखला << वृन्दावन की ओर प्रस्थान, बहुत से असुरों का वध कृष्णावतार की लीलाओं में, बहुत मनोहर अनुभूति और अद्भुत सिद्धांतों का वर्णन हुआ है। उन लीलाओं में एक अद्भुत लीला जिसमें कृष्ण एक कुम्हार और उसके (दधि रखने के) पात्र को कैसे … Read more