यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ४९
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ४८ श्रीवरवरमुनि स्वामीजी और तिरुनारायणपुरम् आयि के मध्य में बैठक जब श्रीवरवरमुनि स्वामीजी कृपाकर आचार्य हृदयम् [श्रीशठकोप स्वामीजी के श्रीसहस्रगीति पर श्रीपिळ्ळैलोकाचार्य के अनुज श्रीअऴगियमणवाळप्पेरुमाळ् नायनार् द्वारा रचित गूढ संकलन] के २२वें सूत्र को समझा रहे थे तो जो वें अर्थ … Read more