యతీంద్ర ప్రవణ ప్రభావము – భాగము 22

శ్రీః  శ్రీమతే శఠకోపాయ నమః  శ్రీమతే రామానుజాయ నమః  శ్రీమత్ వరవరమునయే నమః పూర్తి శ్రేణి << భాగము 21 అళగియ మణవాళ మాముణుల దివ్య అవతారము తుర్కుల దాడులు మరియు ఇతర కారణాల వల్ల ప్రపత్తి మార్గం మెల్లి మెల్లిగా బలహీనపడటంతో, కరుణతో నిండిన శ్రీమహాలక్ష్మికి పతి అయిన పెరియ పెరుమాళ్, శ్రీరంగంలోని ఆదిశేషుని సర్ప శయ్యపై శయనించి ఉండి నిరంతరం ఈ ప్రపంచ సంరక్షణ గురించి ఆలోచిస్తూ, ఒకే ఆచార్యుని ద్వారా దర్శనం (సంప్రదాయము) … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग ७

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग ६ श्रीकलिवैरिदास स्वामीजी एक बार एक व्यक्ति जिसका नाम पेरिय कोयिल् वळ्ळलार् हैं उनसे पूछा की श्रीपरकाल स्वामीजी द्वारा रचित तिरुमोऴि के पहिले पद्य का अर्थ बताये, १-१-९ पाशुर कुलं तरुं (यह पाशुर श्रीमन्नारायण के दिव्य नाम संकीर्तन करने के लाभ … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग ६

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग ५ श्रीकलिवैरिदास स्वामीजी की दो पत्नीयाँ थी। पहिली पत्नी एक दिन प्रसाद बनाती थी और दूसरे दिन दूसरी पत्नी। जब ऐसे हीं प्रतिदिन चल रहा था तब श्रीकलिवैरिदास स्वामीजी ने अपनी पहिली पत्नी को बुलाकर कहा “आप मेरे विषय में अपने … Read more

యతీంద్ర ప్రవణ ప్రభావము – భాగము 21

శ్రీః  శ్రీమతే శఠకోపాయ నమః  శ్రీమతే రామానుజాయ నమః  శ్రీమత్ వరవరమునయే నమః పూర్తి శ్రేణి << భాగము 20 తిరుమలై ఆళ్వార్ మరియు విళాంజోలై పిళ్ళై తిరుమలై ఆళ్వార్ తాను తిరువనంతపురానికి వెళ్లి, విళాంజోలై పిళ్ళైకి పాదాభి వందనాలు సమర్పించుకొని వారి వద్ద అన్ని సంప్రదాయ రహస్య అర్థాలను నేర్చుకోవాలని తమ దివ్య మనస్సులో నిర్ణయించుకున్నారు. ఆళ్వార్ల ప్రధాన శిష్యులన్న హుందాతనాన్ని చూపిస్తూ వారు ఆలయం లోపలికి వెళ్లి, పడగలు విప్పి ఉన్న ఆదిశేషునిపై పవళించి … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग ५

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग ४ श्रीकलिवैरिदास स्वामीजी ओन्बदिनायिरप्पडि को विशिष्ट अर्थो के साथ उनके शिष्य श्रीपेरियवाच्चान पिळ्ळै को सिखाना प्रारम्भ किया। श्रीपेरियवाच्चान पिळ्ळै ने प्रतिदिन इन अर्थों का पट्टोंलै (ताड़ के पत्ते पर पहिली प्रति) बनाना प्रारम्भ किया। कालक्षेप के अन्त में उन सभी हस्तलिपि … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग ४

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग ३ लगभग उस समय एक व्यक्ति  जिन्का नाम देवराज (नम्बूर वरदराजर) था,वह पदुगै चक्रवर्ती मन्दिर के समीप रहता था। उन्हे सभी सामान्य और प्रतिष्ठित जन पसंद करते थे।  वह बड़ा दयालु और सत्व गुणों का प्रदर्शन करता था। श्रीवेदांती स्वामीजी को … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग ३

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग २ इन दोनों भाईयों ने कृपाकर तत्वरहस्यम (सच्चे अस्तित्व के रहस्यों के बारे मे) से प्रारम्भ कर कई प्रबंधों कि रचना कि, १०० वर्ष से भी अधिक विराजमान होकर, कई महान जनों ने अपनी जीविका को छोड़ कर श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी के … Read more

யதீந்த்ர ப்ரவண ப்ரபாவம் – எளிய தமிழாக்கம் – பகுதி 3

ஸ்ரீ:  ஸ்ரீமதே சடகோபாய நம:  ஸ்ரீமதே ராமாநுஜாய நம:  ஸ்ரீமத் வரவரமுநயே நம: யதீந்த்ர ப்ரவண ப்ரபாவம் – எளிய தமிழாக்கம் << பகுதி 2 இந்த இரு சகோதரர்களும் ஒரு நூற்றாண்டுக்கும் மேலாக வாழ்ந்து தொன்மையான தத்வ ரஹஸ்யம் (பரம் பொருளின் உண்மையான நிலை பற்றிய ரஹஸ்யங்கள்) தொடக்கமான பல ப்ரபந்தங்களை அருளிச்செய்தனர்; மேன்மையை உடைய பலரும் பிள்ளை லோகாசார்யரின் திருவடித்தாமரைகளில் சரணடைந்து தங்கள்  வாழ்வை அவரிடம் விட்டு, மிக்க மகிழ்ச்சியுடன் வாழ்ந்து வந்தனர் இவ்வாறான சிஷ்யர்களில் கூரகுலோத்தமதாசர், … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग २

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग १ एक दिन श्रीकलिवैरिदास स्वामीजी अपने दिन नित्य कालक्षेप करने के पश्चात अकेले विश्राम कर रहे थे जब अम्मी, उनके एक शिष्य वडक्कु तिरुवीदिप्पिळ्ळै (श्रीकृष्णपादर् स्वामी) की माताजी दण्डवत प्रणाम कर उनके बगल में खड़ी हो गयी। उन्होंने बड़ी करुणा से … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग १

श्री:  श्रीमते शठकोपाय नमः  श्रीमते रामानुजाय नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << तनियन श्रीय:पति, श्रीमहालक्षमीजी के पति, बड़ी कृपा कर आल्वार श्रीशठकोप स्वामीजी, श्रीपरकाल स्वामीजी, श्रीविष्णुचित्त स्वामीजी जैसे महानों को इस संसार में हम सांसारियों (भोगार्थी) को कलियुग कि नरक से मुक्त करने हेतु अवतरित किया। तत्पश्चात् उन्होने कृपा कर श्रीनाथमुनि स्वामीजी और श्रीयामुनाचार्य … Read more