यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग ८
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग ७ एक समय श्रीकलिवैरिदास स्वामीजी और उनके शिष्य श्रीरङ्गम् में श्रीवैष्णव संप्रदाय को देख्बाल कर्ते हुये निवास कर रहे थे, वहाँ एक स्त्री थी जो स्वामीजी कि शिष्या भि थी,और स्वामीजी के तिरुमळिगै के सटे हुए तिरुमळिगै में रहती थी। एक … Read more