श्रीवचन भूषण – सूत्रं २०१

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम:

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जब यह पूछा गया कि “क्या जब जन्म अथवा ज्ञान में हीन व्यक्ति, इन विषयों में श्रेष्ठ व्यक्ति के प्रति ऐसा अपचार करे केवल तभी यह ‘भागवत अपचार’ क्रूर माना जाता है? अथवा, श्रेष्ठ व्यक्ति द्वारा हीन व्यक्ति के प्रति ऐसा अपचार करने पर भी इसे वैसा ही माना जाएगा?” तो श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी ने इसका उत्तर दिया।

सूत्रं – २०१

इदु तनक्कु अधिकारि नियमम्‌ इल्लै।

सरल अनुवाद

इस ‘भागवत अपचार’ के विषय में व्यक्ति की योग्यता के आधार पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

व्याख्या

इदु तनक्कु …

अर्थात, भागवतों के प्रति अपचार के विषय में व्यक्ति की योग्यता के आधार पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

अडियेन् केशव रामानुज दास

आधार – https://granthams.koyil.org/2021/08/25/srivachana-bhushanam-suthram-201-english/

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