यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ९०

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ८९ जीयर् कोयिल के अनुभव की कमी के लिए दुःखित थे। जबकी श्रीवरवरमुनि स्वामीजी आऴ्वार्तिरुनगरि में विराजमान थे मार्गशीष महिना (धनुर्मास) प्रारम्भ हुआ। श्रीवरवरमुनि स्वामीजी बहुत दुखी हुए कि वें श्रीरामानुज स्वामीजी कि तिरुप्पावै [श्रीरामानुज स्वामीजी तिरुप्पावै से बड़ी गहराई से जुड़े … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ८९

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ८८ महाबली वाणनाथरायन् श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के शरण लेते हैं  जब श्रीवरवरमुनि स्वामीजी मधुरै में थे तब वहाँ के राजा महाबली वाणनाथरायन् श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के सम्पर्क में आए और उनके दिव्य चरणों के शरण हुए। श्रीवरवरमुनि स्वामीजी ने अपनी निर्हेतुक कृपा राजा पर … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ८८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ८७ मधुरकवि स्वामीजी के निष्ठा के जैसे श्रीगोविन्द दास अप्पन्  फिर एक दिन जब सभी जन श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के मठ में एक साथ इकट्ठे हुए थे, हालांकी सभी यह जानते थे कि श्रीवरवरमुनि स्वामीजी ने कहा कि “तेवुमट्रऱियेन्” (दास ओर कोई देवता … Read more

आल्वार तिरुनगरी वैभव – उत्सव

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: आल्वार तिरुनगरी वैभव << सन्निधी प्रतिदिन ताम्रपर्णी नदी से जल लाकर श्रीशठकोप स्वामीजी का तिरुमंजन करते हैं। पूर्ण: वर्ष में भगवान, अम्माजी, आलवार और आचार्य के कई उत्सव होते हैं। हम इस विषय में अब अधीक सीखेंगे। प्रति माह में होनीवाली पालकी … Read more

आल्वार तिरुनगरी वैभव – सन्निधी

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: आल्वार तिरुनगरी वैभव << श्रीवरवरमुनि स्वामीजी का इतिहास और वैभव यहा हम आदिनाथ भगवान के मन्दिर के अंदर की सन्निधि (पवित्र तीर्थ), परिक्रमा मार्ग आनेवाली सन्निधी, मंदिर के बाहर की सन्निधि, मठ और तिरुमाली को जानेंगे। आदिनाथ भगवान के मन्दिर के भीतर की … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ८७

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ८६ काञ्चीपुरम् छोड़ने के पश्चात कन्दाडै अण्णन् दिव्य कावेरी नदी के तट पर श्रीवरवरमुनि स्वामीजी के दिव्य सुवर्ण चरणों को देखने के इच्छा से पधारे। श्रीरङ्गम् के सभी विशेष जन उनके आगमन के विषय को जानकर बहुत प्रसन्न हुए। मंदिर के अर्चक … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ८६

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ८५ कन्दाडै अण्णन् श्रीदेवराज भगवान का सालैक्किणऱु से तिरुमञ्जन कैङ्कयं करते हैं  कन्दाडै अण्णन् श्रीवरदराज भगवान के तिरुवाराधन करने हेतु सालैक्किणऱु से तिरुमञ्जन के लिये पवित्र जल लाने कि इच्छा करते हैं। क्योंकि यह कैङ्कर्य श्रीरामानुज स्वामीजी बड़े आनन्द से करते थे, … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ८५

श्री:श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ८४ अयोध्या रामानुज अय्यङ्गार् कन्दाडै अण्णन् के शरण होते हैं  रामानुज दास ने श्रीअयोध्या रामानुज अय्यङ्गार् को देखकर उन्हें कहा “श्रीमान के दिव्य निर्देशानुसार दास ने बद्रीकाश्रम और अन्य स्थानों पर कैङ्कर्य​ करने कि विधी श्रीअयोध्या रामानुज अय्यङ्गार् को सिखाये और उसके माध्यम … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ८४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ८३ कन्दाडै अण्णन् तिरुमला के लिये प्रस्थान करते हैं  श्रीवरवरमुनि स्वामीजी कन्दाडै अण्णन् स्वामीजी पर कृपाकर अनुग्रह किये और उनसे पूछे “क्या आप श्रीमान को श्रीवेङ्कटेश भगवान का मङ्गळाशासन् नहीं करना चाहिये?” अप्पिळ्ळै जो निकट में थे ने उत्तर दिया “क्या कन्दाडै … Read more

यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ८३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ८२ कोयिल् में आगे की घटनाएँ जिस दिन श्रीवेङ्कटेश​ भगवान ने तिरुमलै अय्यङ्गार् को तिरुमला में कैङ्कर्य करने को कहा उस दिन श्रीवरवरमुनि स्वामीजी श्रीसहस्रगीति के ३.३ दशक ओऴिविल्कालमेल्लम् उडनाय् मन्नि व​ऴुविला अडिमै सेय्य वेण्डुम् नाम्  (बिना रूके हमे निरंतर दोषरहित कैङ्कर्य … Read more