श्रीवचनभूषण – सूत्रं १०३

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी एक जिज्ञासु व्यक्ति के प्रश्न का समर्थन करते हैं कि, “इन कारणों से (पिछले सूत्र में बताया गया है) यह वैराग्य कैसे उत्पन्न होता है?” और कृपापूर्वक इसका उत्तर समझाते हैं। सूत्रं – १०३ पिऱक्कुम् क्रमम् … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १०२

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी दयापूर्वक इस शंका का उत्तर दे रहे हैं कि, “कर्तव्य समझकर जिन कार्यों को करने की अनुमति है, उनका त्याग तभी होगा जब यह विचार त्याग दिया जाए कि वे आनंददायक हैं; ऐसी स्थिति में, जो … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १०१

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी प्रपन्नों के लिये ऐसे महत्त्व को समझाते हैं। सूत्रं – १०१ मट्रै इरुवर्क्कुम् निषिद्ध विषय निवृत्तिये अमैयुम्; प्रपन्ननुक्कु विहित विषय निवृत्ति तन्नेट्रम्। सरल अनुवाद अन्य दो के लिए (जो सांसारिक सुखों की चाह रखते हैं और … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं १००

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कहते हैं, “यद्यपि ये तीनों प्रकार के व्यक्तित्वों के लिए वांछनीय हैं, तथापि इनका प्रपन्न में उपस्थित होना अन्य की अपेक्षा अधिक आवश्यक है”। सूत्रं – १०० मूवरिलुम् वैत्तुक्कॊण्डु मिगवुम् वेण्डुवदु प्रपन्ननुक्कु। सरल अनुवाद इन तीनों … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं ९९

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कहते हैं कि ये शम और दम उन लोगों के लिए आवश्यक हैं जो सांसारिक सुख चाहते हैं और साथ ही उन लोगों के लिए भी जो मोक्ष चाहते हैं। सूत्रं – ९९ इदुदान् ऐश्वर्य कामरक्कुम्, … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं ९८

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका इस प्रकार, आरोही क्रम में शम और दम की प्राप्ति के फल की क्रमबद्ध प्राप्ति को समझाने के पश्चात, श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक अवरोही क्रम में इन विषयों में से प्रत्येक के शाश्वत होने का कारण बताते हैं। सूत्रं … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं ९७

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका तत्पश्चात्, श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी कृपापूर्वक शम और दम प्राप्त करने पर होने वाले परिणामों का क्रम समझाते हैं। सूत्रं – ९७ इवै इरण्डुम् उण्डानाल् आचार्यन् कैपुगुरुम्; आचार्यन् कैपुगुन्दवाऱे तिरुमन्त्रम् कैपुगुरुम्; तिरुमन्त्रम् कैपुगुन्दवाऱे ईश्वरन् कैपुगुरुम्; ईश्वरन् कैपुगुन्दवाऱे “वैगुन्द मानगर् मट्रदु … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं ९६

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी ने यह समझाने के पश्चात यह स्पष्ट किया कि भगवान के प्रति इच्छा ही सभी श्रेष्ठ गुणों का मुख्य कारण है और सांसारिक विषयों से विरक्त होने के गुण का प्रमाण दिया। जब उनसे इसका कारण … Read more

श्रीवचन भूषण – सूत्रं ९५

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी इस सिद्धांत (भगवान के प्रति महान इच्छा जो उत्तम गुणों की ओर ले जाती है) के लिए शास्त्रीय प्रमाण प्रस्तुत करते हैं। सूत्रं – ९५ “मऱ्-पाल् मनम् सुऴिप्प”, “परमात्मनि तो रक्तः”, “कण्डु केट्टु उट्रु मोन्दु”। सरल … Read more

श्रीवचनभूषण – सूत्रं ९४

श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्रीवानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका जब पूछा गया कि “क्या भगवान के प्रति ऐसी महान इच्छा भगवान की महानता के अधीन नहीं है? क्या शम (मानसिक संतुलन), दम (आत्मसंयम) आदि जैसे श्रेष्ठ आत्मगुण योग्यता को परिष्कृत करते‌ हैं?” श्रीपिळ्ळै लोकाचार्य स्वामीजी बताते हैं … Read more